Bhadrapada Amavasya Date: हिंदू धर्म में भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या का महत्व बहुत अधिक है। इस अमावस्या को कुशग्रहणी या पिठोरी अमावस्या भी कहा जाता है। इसे भादों अमावस्या भी कहते हैं। हिंदू धर्म में अमावस्या के दिन पितृ तर्पण करने का विधान है। भाद्रपद मास की अमावस्या को भगवान श्री कृष्ण को समर्पित माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन पितरों को प्रसन्न करने से जीवन में सुख शांति आती है। कुछ जगहों पर महिलाएं अपने पुत्र की लंबी उम्र के लिए पिठोरी अमावस्या पर मां दुर्गा की अराधना करती हैं। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन अपने घर के पितृ देवताओं को याद करके उनके निमित्त दान आदि करते हैं। उनके घर-परिवार से पितृदोष खत्म हो जाता है।
अमावस्या का महत्व: अमावस्या की तिथि शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष दोनों पक्षों में बहुत अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। कहते हैं अगर किसी के घर में पितृदोष लग जाए यानी अगर उसके पितृ उससे नाराज हो जाएं तो घर में कोई मांगलिक कार्यक्रम या पुत्र आदि का जन्म नहीं होता है। जिन लोगों के घरों में पितृ दोष लगा होता है उनके घरों में फूल पौधे बड़े नहीं होते हैं। वह समय से पहले ही मुरझा जाते हैं। ऐसे में घर में पितृ दोष का ना लगना बहुत जरूरी हो जाता है।
जिन लोगों को अपने घर परिवार में मांगलिक कार्य ना होते हुए दिखते हों उन्हें अमावस्या के दिन अवश्य ही पितृ दोष के लिए तर्पण करना चाहिए। अमावस्या के दिन पितरों के लिए तर्पण करने से पितृदेव प्रसन्न होते हैं और परिवार के सभी सदस्यों पर अपनी कृपा बरसाते हैं। जिससे परिवार के लोग अपने रोजगार, नौकरी और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कामयाबी हासिल करने लगते हैं।
इस दिन क्या करना चाहिए: हिंदू धर्म में मान्यता है कि अमावस्या की रात को अपने परिवार के पितरों के लिए तर्पण अवश्य करना चाहिए। पितरों के लिए तर्पण करने में उनके निमित्त अन्न, फल, जल और दक्षिणा आदि का दान किया जाता है। कहते हैं जो कोई व्यक्ति अपने पितरों को याद करके इस प्रकार उनके लिए तर्पण करता है। उसके सभी दुख दूर हो जाते हैं। साथ ही पितृदोष से भी मुक्ति मिलती है। भाद्रपद अमावस्या को पितरों के लिए तर्पण करना अच्छा माना जाता है।
भाद्रपद अमावस्या तिथि:
18 अगस्त, मंगलवार – सुबह – 10 बजकर 39 मिनट से
19 अगस्त, बुधवार – सुबह – 08 बजकर 11 मिनट तक
