Maa Baglamukhi Jayanti 2020: वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी को देवी बगलामुखी का अवतरण माना जाता है। जिस कारण इस दिन को इनकी जयंती के रूप में मनाने की परंपरा है। इस वर्ष यह जयन्ती 1 मई को मनाई जायेगी। इस दिन इनके उपासक व्रत रखा विशेष पूजा अर्चना करते हैं। इनकी जयंती पर जगह-जगह अनुष्ठान के साथ महायज्ञ का भी आयोजन किया जाता है। माना जाता है कि मां बगलामुखी की कृपा से शत्रुओं का नाश हो जाता है और जीवन में आ रहे संकट दूर हो जाते हैं।

मां बगलामुखी की पूजा का महत्व: इनकी पूजा से भक्तों के भय दूर हो जाते हैं, शत्रुओं का नाश होता है तथा व्यक्ति को हर प्रकार की बाधा से मुक्ति मिल जाती है। माता बुरी शक्तियों का नाश करती हैं। इनका एक नाम पीताम्बरा भी है इनका प्रिय रंग पीला माना जाता है इसलिए इनके पूजन में पीले रंग की सामग्री का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। देवी बगलामुखी दसमहाविद्या में आठवीं महाविद्या हैं यह स्तम्भन की देवी हैं। शत्रुनाश, वाकसिद्धि, वाद विवाद में विजय के लिए इनकी उपासना की जाती है।

मां बगलामुखी का नाम और स्वरूप: बगला शब्द संस्कृत भाषा के वल्गा का अपभ्रंश है, जिसका अर्थ है दुलहन अत: मां के अलौकिक सौंदर्य और स्तंभन शक्ति के कारण ही इन्हें यह नाम प्राप्त है। देवी बगलामुखी रत्नजड़ित सिंहासन पर विराजित होती हैं और रत्नमय रथ पर आरूढ़ हो शत्रुओं का नाश करती हैं। पीले फूल और नारियल चढाने से देवी प्रसन्न होतीं हैं। देवी की मूर्ति पर पीला वस्त्र चढाने से बड़ी से बड़ी बाधा भी नष्ट हो जाती है, दुखों का नाश करने के लिए बगलामुखी देवी के मन्त्रों को फलदायी माना जाता है।

मंत्र | Mantra
ऊँ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां
वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्ववां कीलय
बुद्धि विनाशय ह्रीं ओम् स्वाहा।

ऐसे हुई मां बगलामुखी की उत्पत्ति: शास्त्रों के अनुसार, यह माना जाता है कि एक बार भारी बाढ़ के कारण पृथ्वी का पूर्ण विनाश हो गया था।सभी जीवित प्राणी और पूरी सृष्टि दांव पर थी। तब देवता भगवान शिव की शरण में सहायता मांगने के लिए पहुंचे। देवता ने सुझाव दिया कि केवल देवी शक्ति में ही तूफान को शांत करने की शक्ति है। पृथ्वी को पीड़ा से बचाने के लिए देवी बगलामुखी हरिद्रा सरोवर से निकलीं और उन सभी को बचाया। उस दिन के बाद से, देवी बगलामुखी को विपत्तियों और बुराइयों से राहत पाने के लिए पूजा जाता है।