Gupt Navratri 2020: शक्ति का रूप मां दूर्गा की अराधना के लिए साल में 4 बार नवरात्रि मनाई जाती है। इनमें से दो बार बड़े स्तर पर नवरात्रि पर्व मनाया जाता है। इन्हें भक्त चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि के नाम से जानते हैं। इन दोनों ही नवरात्रि में मां दूर्गा के अलग-अलग नौ रूपों की उपासना की जाती है। लेकिन साल में दो बार नवरात्र ऐसे भी आते हैं जब मां दुर्गा की दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है। इन्हें गुप्त नवरात्र कहा जाता है। ये दस महाविद्याएं हैं- काली, तारा देवी, त्रिपुर-सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरी भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मातंगी व कमला देवी।
बता दें कि माघ और आषाढ़ मास में पड़ने वाले नवरात्र गुप्त माने जाते हैं। आषाढ़ मास का गुप्त नवरात्र आज से शुरू हो चुका है और इसका समापन 30 जून को होगा। ये गुप्त नवरात्र तंत्र विद्या में विश्वास रखने वाले तांत्रिकों के लिये खास माने जाते हैं। इन 9 दिनों तक साधक मां दुर्गा की कठिन भक्ति और तपस्या करते हैं। ऐसा माना जाता है कि भक्तों द्वारा की गई भक्ति और सेवा से मां प्रसन्न होकर साधकों को अतुल्य शक्ति देती हैं। साथ ही उनके सभी मनोरथ सिद्ध करती हैं।
मानसिक पूजा का महत्व: गुप्त नवरात्रि में मानसिक पूजा का विधान है। गुप्त नवरात्रि में मानसिक पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस पूजा को करने से देवी मां मनोकामनाओं को पूरा करती है। आषाढ़ माह में पड़ने वाली इस नवरात्रि में माता की पूजा देर रात को की जाती है। ज्योतिषों के अनुसार भक्तों को नौ दिनों तक व्रत का संकल्प लेना चाहिए और प्रतिपदा के दिन घट स्थापना करना चाहिए। सुबह शाम मां दुर्गा की पूजा करना भी साधकों के लिए फायदेमंद साबित होगा। अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं का पूजन करने के बाद व्रत का उद्यापन करना चाहिए।
क्या करने से होगा लाभ: ज्योतिषों के अनुसार गुप्त नवरात्रि के पूरे 9 दिनों तक लोगों को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। कुश से बनी चटाई पर सोने की भी सलाह देते हैं। इन 9 दिनों के दौरान लोगों को या तो निर्जला व्रत या फिर फलाहार पर रहना चाहिए। गुप्त नवरात्रि में घर में साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए।
इन चीजों से करें परहेज: भक्त जो इन 9 दिनों तक व्रत करेंगे उन्हें इस दौरान काले कपड़े नहीं पहनना चाहिए। नमक, अनाज, प्याज और लहसुन का सेवन करना भी इन दिनों वर्जित होता है। इस दौरान बाल नहीं कटवाने चाहिए, बच्चों का मुंडन संस्कार भी इस समय में नहीं करना चाहिए। गुप्त नवरात्रि के दौरान किसी भी व्यक्ति को अपशब्द नहीं बोलना चाहिए। ज्योतिष के अनुसार व्रत व अनुष्ठान करने वाले भक्तों को दिन में सोना नहीं चाहिए।
