हिंदू पांचांग के अनुसार आषाढ़ चौथा महीना होता है। इस बार आषाढ़ मास 18 जून से शुरू हो गई है। जो अगले 16 जुलाई तक रहने वाला है। शास्त्रों में आषाढ़ मास को संधि काल का महीना बताया गया है। इसी महीने से वर्षा ऋतु की शुरुआत हो जाती है। साथ ही इस महीने में संक्रमण रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ मास मनोकामना पूर्ति के लिए शुभ है। विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा भी इसी महीने में आयोजित की जाती है। इस प्रकार आषाढ़ का महीना बहुत सारे धार्मिक कार्यों के लिए शुभ माना गया है। आगे जानते हैं कि इस महीने में कौन-कौन का करना शुभ होता है। साथ ही इस महीने में किन कामों में सावधानी बरतनी चाहिए।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक आषाढ़ के महीने में सूर्य देव की उपासना अधिक लाभकारी है। शक्ति (देवी) की उपासना और तंत्र विद्या में सिद्धियां प्राप्त के लिए गुप्त नवरात्रि भी इसी महीने में पड़ती है। वहीं मान्यता यह भी है कि भगवान विष्णु चार महीने के लिए शयन में चले जाते हैं। इसलिए अगले चार महीने कोई भी नए शुभ काम करने की मनाही होती है। इसके अलावा आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पुर्णिमा का उत्सव मनाया जाता है। इसलिए इस महीने गुरु की उपासना सबसे अधिक पुण्यदायी है।
देवी की उपासना के लिए भी आषाढ़ मास को अत्यंत शुभ माना गया है। कहते हैं कि इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना से संतान प्राप्ति का वरदान प्राप्त होता है। शरीर में ऊर्जा को बरकरार रखने के लिए सूर्य और मंगल की उपासना लाभकारी है। खान-पान में भी इस महीने कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। इस महीने में वैसे फलों का सेवन करना चाहिए जिसमें जल की प्रचूर मात्र हो। आषाढ़ मास में बेल नहीं खाना चाहिए। साथ ही जहां तक संभव हो सके तेल वाली चीजों को खाने से परहेज करना चाहिए। वहीं इस महीने में नींबू, सौंफ और हींग का प्रयोग सेहत के लिए अच्छा होता है।
