अक्षय तृतीया साल का सबसे शुभ और मंगलकारी अवसर होता है। यह हर साल वैशाख मास के शुक्लपक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। इस साल यानि 2019 में अक्षय तृतीया 07 मई, मंगलवार को मनाई जा रही है। इस दिन धन-वैभव की देवी लक्ष्मी के साथ-साथ भगवान विष्णु की उपासना की जाती है। साथ ही अक्षय तृतीया पर महिलाएं अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं और देवी लक्ष्मी से धन-वैभव का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। इसी क्रम में आज हम आपको बता रहे हैं कि अक्षय तृतीया की पूजा और व्रत-विधि क्या है। आगे इसे जानते हैं।
अक्षय तृतीया पूजा-विधि: अक्षय तृतीया सर्वसिद्ध मुहूर्तों में से एक मुहूर्त है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। महिलाएं अपने और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान के बाद श्री विष्णुजी और माता लक्ष्मी की प्रतिमा पर अक्षत चढ़ाना चाहिए। इसके बाद शांत चित्त से उनकी सफेद कमल के पुष्प या सफेद गुलाब, धूप औरचंदन इत्यादि से पूजा अर्चना करनी चाहिए। भोग के रूप में जौ, गेंहू, या सत्तू, ककड़ी, चने की दाल आदि का प्रयोग करें। इसी दिन ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। साथ ही फल-फूल, बर्तन, वस्त्र, गौ, भूमि, जल से भरे घड़े, कुल्हड़, पंखे, खड़ाऊं, चावल, नमक, घी, खरबूजा, चीनी, साग, आदि दान करना पुण्यकारी माना जाता है।
व्रत-कथा: एक पौराणिक कथा के अनुसार महाभारत के काल में जब पांडव वनवास में थे। एक दिन श्रीकृष्ण जो स्वयं भगवान विष्णु के अवतार है, ने उन्हें एक अक्षय पात्र उपहार स्वरुप दिया था। यह ऐसा पात्र था जो कभी भी खाली नहीं होता था और जिसके सहारे पांडवों को कभी भी भोजन की चिंता नहीं हुई और मांग करने पर इस पात्र से असीमित भोजन प्रकट होता था। श्रीकृष्ण से सम्बंधित एक और कथा अक्षय तृतीया के संदर्भ में प्रचलित है। कथा के अनुसार श्रीकृष्ण के बालपन के मित्र सुदामा इसी दिन श्रीकृष्ण के द्वार उनसे अपने परिवार के लिए आर्थिक सहायता मांगने गए थे। भेंट के रूप में सुदामा के पास केवल एक मुट्ठीभर पोहा ही था।
श्रीकृष्ण से मिलने के बाद अपना भेंट उन्हें देने में सुदामा को संकोच हो रहा था। परंतु भगवान कृष्ण ने मुट्ठीभर पोहा सुदामा के हाथ से लिया और बड़े ही चाव से खाया। चूंकि सुदाम श्रीकृष्ण के अतिथि थे इसलिए श्रीकृष्ण ने उनका भव्य रूप से आदर-सत्कार किया। ऐसे सत्कार से सुदामा बहुत ही प्रसन्न हुए किन्तु आर्थिक सहायता के लिए श्रीकृष्ण ने कुछ भी कहना उन्होंने उचित नहीं समझा और वह बिना कुछ बोले अपने घर के लिए निकल पड़े। जब सुदामा अपने घर पहुंचें तो दंग रह गए। उनके टूटे-फूटे झोपड़े के स्थान पर एक भव्य महल था और उनकी गरीब पत्नी और बच्चें नए वस्त्र, आभूषण से सुसज्जित थे। सुदामा को यह समझते देर न हुई कि यह उनके मित्र और विष्णु अवतार श्रीकृष्ण का ही आशीर्वाद है। यही कारण है कि अक्षय तृतीया को धन-संपत्ति की लाभ प्राप्ति से भी जोड़ा गया है।
