Ahoi Ashtami, Moon Rise TimeToday, Aaj Tare Kitne Baje Nikalege Updates: आज अहोई अष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा है। पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, खुशहाली के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को तारों को अर्घ्य देने के साथ अपना व्रत खोलती हैं। आइए जानते हैं अहोई अष्टमी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, तारों को अर्घ्य देने का समय से लेकर अन्य जानकारी…
अहोई अष्टमी का शुभ मुहूर्त (Ahoi Ashtami 2025 Shubh Muhurt)
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि आरंभ- 13 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 24 मिनट से
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि समाप्त- 14 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 09 मिनट तक
अहोई अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त- शाम 5 बजकर 53 मिनट से शाम 7 बजकर 08 मिनट तक
तारे देखकर दिया जाएगा अर्घ्य
अहोई अष्टमी के दिन महिलाएं संतान की दीघार्यु, तरक्की और अच्छे स्वास्थ्य के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इसके बाद तारों के निकलने के बाद उनकी पूजा व्रत खोलती हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार, आज अहोई अष्टमी पर तारे निकलने का समय शाम 7 बजकर 32 मिनट तक है।
अहोई अष्टमी व्रत कथा (Ahoi Ashtami Vrat Katha)
हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है। आइए जानते हैं व्रत कथा…
Ahoi Ashtami Vrat Katha In Hindi: अहोई अष्टमी के दिन इस कथा का करें पाठ, संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि का मिलेगा आशीर्वाद, जानें संपूर्ण पौराणिक व्रत कथा
Ahoi Mata Ki Aarti: अहोई माता की आरती
जय अहोई माता जय अहोई माता। तुमको निशिदिन सेवत हर विष्णु विधाता॥
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
ब्रह्माणी रूद्राणी कमला तू ही है जगमाता । सूर्य चन्द्रमा ध्यावत नारद ऋषि गाता।।
मैया जय अहोई माता, जय जय होई माता।
माता रूप निरंजन सुख सम्पति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत नित मंगल आता।
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
तू ही है पाताल वसंती, तू ही शुभदाता। कर्मप्रभाव प्रकाशक जगनिधि से त्राता।।
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
जिस घर थारो बासो वाही में गुण आता। कर न सके सोई करले मन नहीं घबराता।।
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
तुम बिन सुख न होवे पुत्र न कोई पाता। खान पान का वैभव तुम बिन नही जाता।।
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
शुभ गुण सुन्दर मुक्ता क्षीरनिधि जाता। रत्न चतुर्दश तोकूं कोई नहीं पाता।।
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
श्री अहोई माँ की आरती जो कोई भी गाता। उर उमंग अतिं उपजे पाप उतर जाता।।
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
अहोई अष्टमी पर करें सिंघाड़े का दान
अहोई अष्टमी व्रत पर सिंघाड़े का विशेष महत्व है। इस दिन सिंघाड़े का दान करने से सुख-समृद्धि आती है।
अहोई अष्टमी पर पढ़ें गणेश जी की ये कथा (Ahoi Ashtami Ganesh Ji Ki Vrat Katha)
एक बूढ़ी औरत थी, जिसका एक बेटा और बहू थी। वे बहुत गरीब थे। बूढ़ी मां हर दिन गणेश जी की पूजा किया करती थी। गणेश जी रोज़ उससे कहते —”बूढ़ी मां! कुछ मांग लो।” बूढ़ी मां कहती — “मैं क्या मांगूँ?” तब गणेश जी बोले — “अपने बेटे से पूछ लो।”
बूढ़ी मां ने अपने बेटे से पूछा, तो बेटे ने कहा — “मां, धन मांग लो।” फिर बहू से पूछा तो उसने कहा — “सासूजी, पोता मांग लेना।” बूढ़ी मां ने सोचा कि दोनों अपनी-अपनी इच्छा के मुताबिक मांग रहे हैं, इसलिए वह पड़ोसन के पास गई। पड़ोसन ने कहा — “पगली! क्यों धन मांग रही हो? क्यों पोता मांग रही हो? जिंदगी तो थोड़ी सी है, अपनी सुंदर काया मांग लो।”
घर आकर बूढ़ी मां ने सोचा कि बेटा-बहू भी खुश हों, इसलिए उनकी भी माननी चाहिए। अगले दिन गणेश जी आए और बोले — “बूढ़ी मां! कुछ मांगो।”
बूढ़ी मां ने कहा — “मुझे सुंदर काया दो, सोने के कटोरे में पोते को दूध पीता देखूं, अमर सुहाग दो, निरोगी काया दो, भाई दो, भतीजे दो, पूरा परिवार दो, सुख दो और मोक्ष दो।”
गणेश जी बोले — “बूढ़ी मां! तुमने तो मुझे धोखा दे दिया। सब कुछ मांग लिया। अब जैसा कहा है वैसा ही होगा।” और वे अचानक गायब हो गए।
अब बूढ़ी मां के यहां सब कुछ वैसा ही हो गया। हे गणेश जी महाराज! जो कुछ आपने बूढ़ी मां को दिया, वैसा सभी को भी दें।
अहोई अष्टमी व्रत की पूजा विधि (Ahoi Ashtami 2025 Puja Vidhi)
सबसे पहले मां अहोई का स्नेहपूर्वक स्मरण करें और घर में गंगाजल का छिड़काव करके वातावरण को पवित्र बनाएं। फिर दीवार पर अहोई माता की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। उसके बाद दीप प्रज्वलित करें, पुष्प अर्पित करें और धूप-दीप से माता की आराधना करें। अपनी मनोकामनाएं माता के चरणों में समर्पित करें। संध्या के समय जब आसमान में तारे दिखाई देने लगें, तब उन्हें अर्घ्य अर्पित करें। अंत में पूजा के लिए बनाए गए पकवान माता को भोग लगाएं और घर के बड़ों का आशीर्वाद लेकर व्रत का पारण करें।
अहोई अष्टमी व्रत का पारण कब? (Ahoi Ashtami Vrat Paran)
अहोई अष्टमी व्रत का पारण तारों को अर्घ्य देने के बाद किया जाता है। इसलिए जब आप तारों या फिर चंद्रमा को अर्घ्य दे दें और फिर इसके बाद व्रत का पारण कर लें।
अहोई अष्टमी 2025 पर चांद निकलने का समय (Ahoi Ashtami 2025 Moon Rise Time)
हिंदू पंचांग के अनुसार, 13 अक्टूबर 2025 को चंद्रोदय का समय रात 11 बजकर 20 मिनट है।
अहोई अष्टमी पर दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम में किस समय निकलेंगे तारे
नई दिल्ली- शाम 06 बजकर 17 मिनट
नोएडा- शाम 06 बजकर 20 मिनट
गुरुग्राम- शाम 06 बजकर 20 मिनट
अहोई अष्टमी पर माता को लगाएं ये भोग (Ahoi Ashtami 2025 Bhog)
अहोई माता को पूजा के समय खीर, रसमलाई, छेना बर्फी, रलगुल्ला के अलावा गुलगुले या फिर सिंघाड़े से बनी रेसिपी भोग में चढ़ा सकती है।
Ahoi Mata Ki Aarti: अहोई माता की आरती
जय अहोई माता जय अहोई माता। तुमको निशिदिन सेवत हर विष्णु विधाता॥
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
ब्रह्माणी रूद्राणी कमला तू ही है जगमाता । सूर्य चन्द्रमा ध्यावत नारद ऋषि गाता।।
मैया जय अहोई माता, जय जय होई माता।
माता रूप निरंजन सुख सम्पति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत नित मंगल आता।
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
तू ही है पाताल वसंती, तू ही शुभदाता। कर्मप्रभाव प्रकाशक जगनिधि से त्राता।।
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
जिस घर थारो बासो वाही में गुण आता। कर न सके सोई करले मन नहीं घबराता।।
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
तुम बिन सुख न होवे पुत्र न कोई पाता। खान पान का वैभव तुम बिन नही जाता।।
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
शुभ गुण सुन्दर मुक्ता क्षीरनिधि जाता। रत्न चतुर्दश तोकूं कोई नहीं पाता।।
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
श्री अहोई माँ की आरती जो कोई भी गाता। उर उमंग अतिं उपजे पाप उतर जाता।।
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
Ahoi Ashtami 2025 LIVE: पटना, हैदराबाद और जयपुर में कब दिखेंगे तारे
– शाम 06 बजकर 17 मिनट
पटना- शाम 06 बजकर 09 मिनट
हैदराबाद-शाम 06 बजकर 17 मिनट
जयपुर- शाम 06 बजकर 20 मिनट
अहोई अष्टमी व्रत कथा इन हिंदी (Ahoi Ashtami Vrat Katha In Hindi)
प्राचीन समय में एक साहुकार था, जिसके सात बेटे और सात बहुएं थी। साहुकार की एक बेटी भी थी जो दीपावली में ससुराल से मायके आई थी। दीपावली पर घर को लीपने के लिए सातों बहुएं मिट्टी लाने जंगल में गई तो ननद भी उनके साथ हो ली। साहुकार की बेटी जहां मिट्टी काट रही थी उस स्थान पर स्याहु (साही) अपने साथ बेटों से साथ रहती थी। मिट्टी काटते हुए गलती से साहूकार की बेटी की खुरपी की चोट से स्याहू का एक बच्चा मर गया। स्याहू इस पर क्रोधित होकर बोली मैं तुम्हारी कोख बाधूंगी। स्याहू के वचन सुनकर साहूकार की बेटी अपनी सातों भाभियों से एक-एक कर विनती करती हैं कि वह उसके बदले अपनी कोख बंधवा लें। सबसे छोटी भाभी ननद के बदले अपनी कोख बंधवाने के लिए तैयार हो जाती है। इसके बाद छोटी भाभी के जो भी बच्चे होते हैं वे सात दिन बाद मर जाते हैं। सात पुत्रों की इस प्रकार मृत्यु होने के बाद उसने पंडित को बुलवाकर इसका कारण पूछा। पंडित ने सुरही गाय की सेवा करने की सलाह दी।
सुरही सेवा से प्रसन्न होती है और उसे स्याहु के पास ले जाती है। रास्ते थक जाने पर दोनों आराम करने लगते हैं, अचानक साहुकार की छोटी बहू की नजर एक ओर जाती हैं, वह देखती है कि एक सांप गरूड़ पंखनी के बच्चे को डंसने जा रहा है और वह सांप को मार देती है। इतने में गरूड़ पंखनी वहां आ जाती है और खून बिखरा हुआ देखकर उसे लगता है कि छोटी बहु ने उसके बच्चे को मार दिया है इस पर वह छोटी बहू को चोंच मारना शुरू कर देती है।
छोटी बहू इस पर कहती है कि उसने तो उसके बच्चे की जान बचाई है। गरूड़ पंखनी इस पर खुश होती है और सुरही सहित उन्हें स्याहु के पास पहुंचा देती है। वहां स्याहु छोटी बहू की सेवा से प्रसन्न होकर उसे सात पुत्र और सात बहु होने का अशीर्वाद देती है। स्याहु के आशीर्वाद से छोटी बहु का घर पुत्र और पुत्र वधुओं से हरा भरा हो जाता है।
Ahoi Mata Ki Aarti: अहोई माता की आरती
जय अहोई माता जय अहोई माता। तुमको निशिदिन सेवत हर विष्णु विधाता॥
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
ब्रह्माणी रूद्राणी कमला तू ही है जगमाता । सूर्य चन्द्रमा ध्यावत नारद ऋषि गाता।।
मैया जय अहोई माता, जय जय होई माता।
माता रूप निरंजन सुख सम्पति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत नित मंगल आता।
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
तू ही है पाताल वसंती, तू ही शुभदाता। कर्मप्रभाव प्रकाशक जगनिधि से त्राता।।
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
जिस घर थारो बासो वाही में गुण आता। कर न सके सोई करले मन नहीं घबराता।।
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
तुम बिन सुख न होवे पुत्र न कोई पाता। खान पान का वैभव तुम बिन नही जाता।।
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
शुभ गुण सुन्दर मुक्ता क्षीरनिधि जाता। रत्न चतुर्दश तोकूं कोई नहीं पाता।।
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
श्री अहोई माँ की आरती जो कोई भी गाता। उर उमंग अतिं उपजे पाप उतर जाता।।
मैया जय अहोई माता, जय जय अहोई माता।
अहोई अष्टमी पर शहर के अनुसार तारा निकलने का समय (Ahoi Ashtami 2025 Star Moon Time)
नई दिल्ली- शाम 06 बजकर 17 मिनट
नोएडा- शाम 06 बजकर 20 मिनट
मुंबई- शाम 06 बजकर 20 मिनट
गुरुग्राम- शाम 06 बजकर 20 मिनट
कोलकाता- शाम 06 बजकर 08 मिनट
चेन्नई शाम- 06 बजकर 08 मिनट
बैंगलुरु- शाम 06 बजकर 17 मिनट
पटना- शाम 06 बजकर 09 मिनट
हैदराबाद-शाम 06 बजकर 17 मिनट
जयपुर- शाम 06 बजकर 20 मिनट
भोपाल- शाम 06 बजकर 17 मिनट
उज्जैन- शाम 06 बजकर 17 मिनट
इंदौर – शाम 06 बजकर 17 मिनट
नागपुर- शाम 06 बजकर 17 मिनट
अहमदाबाद- शाम 06 बजकर 20 मिनट
सूरत- शाम 06 बजकर 17 मिनट
शिमला- शाम 06 बजकर 17 मिनट
वडोदरा- शाम 06 बजकर 20 मिनट
वाराणसी- शाम 06 बजकर 10 मिनट
आगरा- शाम 06 बजकर 17 मिनट
बिलासपुर- शाम 06 बजकर 10 मिनट
रांची- शाम 06 बजकर 10 मिनट
जमशेदपुर-शाम 06 बजकर 10 मिनट
कटक- शाम 06 बजकर 09 मिनट
लेह- शाम 06 बजकर 17 मिनट
लखीमपुर- शाम 06 बजकर 17 मिनट
अहोई अष्टमी व्रत की पूजा विधि (Ahoi Ashtami 2025 Puja Vidhi)
सबसे पहले मां अहोई का स्नेहपूर्वक स्मरण करें और घर में गंगाजल का छिड़काव करके वातावरण को पवित्र बनाएं। फिर दीवार पर अहोई माता की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। उसके बाद दीप प्रज्वलित करें, पुष्प अर्पित करें और धूप-दीप से माता की आराधना करें। अपनी मनोकामनाएं माता के चरणों में समर्पित करें। संध्या के समय जब आसमान में तारे दिखाई देने लगें, तब उन्हें अर्घ्य अर्पित करें। अंत में पूजा के लिए बनाए गए पकवान माता को भोग लगाएं और घर के बड़ों का आशीर्वाद लेकर व्रत का पारण करें।
अहोई अष्टमी पर जानें गणेश जी की दूसरी कथा (Ahoi Ashtami Vrat Katha)
एक दिन गणेश जी महाराज चुटकी में चावल और चम्मच में दूध लेकर घूम रहे थे और बोले — “कोई मेरी खीर बना दे।” सबने थोड़ा सामान देखकर मना कर दिया। तभी एक बुढ़िया बोली लाओ बेटा, मैं तेरी खीर बना दूंगी,” और वह कटोरी लेकर आई।
गणेश जी बोले बुढ़िया माई, कटोरी क्यों लाई? टोप लेकर आओ।” बुढ़िया माई टोप लेकर आई और उसे दूध से भर दिया। गणेश जी महाराज बोले — “मैं बाहर जाकर आता हूं, तब तक तू खीर बना लेना।”
खीर बनकर तैयार हो गई। बुढ़िया माई की बहू के मुँह में पानी आ गया। वह दरवाज़े के पीछे जाकर खीर खाने लगी। लेकिन खीर का एक छींटा ज़मीन पर गिर गया, जिससे गणेश जी का भोग लग गया।
कुछ देर बाद बुढ़िया गणेश जी को बुलाने गई। गणेश जी बोले — “बुढ़िया माई, मेरा तो भोग लग गया। तेरी बहू जब दरवाज़े के पीछे खीर खा रही थी, एक छींटा ज़मीन पर गिर गया था।”
बुढ़िया बोली — “बेटा, अब इसका क्या करूँ?” गणेश जी ने कहा — “सारी खीर अच्छे से खा-पीकर सबको बांट देना। जो बच जाए, उसे थाली में डालकर छींके पर रख देना।”
शाम को गणेश जी महाराज आए और बुढ़िया से बोले — “बुढ़िया, मेरी खीर दो।” जब बुढ़िया खीर लेने गई, तो उस थाली में हीरे-मोती चमक रहे थे।
गणेश जी महाराज ने जो धन-दौलत बुढ़िया को दी, वैसा सबको भी मिले।
अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त (Ahoi Ashtami 2025 Puja Muhurat)
अहोई अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 53 मिनट से शाम 7 बजकर 08 मिनट तक रहेगा। इस दौरान मां अहोई की पूजा करने के साथ व्रत कथा पढ़ने या फिर सुनने का विधान है।
अहोई अष्टमी पर पढ़ें गणेश जी की ये कथा (Ahoi Ashtami Ganesh Ji Ki Vrat Katha)
एक बूढ़ी औरत थी, जिसका एक बेटा और बहू थी। वे बहुत गरीब थे। बूढ़ी मां हर दिन गणेश जी की पूजा किया करती थी। गणेश जी रोज़ उससे कहते —”बूढ़ी मां! कुछ मांग लो।” बूढ़ी मां कहती — “मैं क्या मांगूँ?” तब गणेश जी बोले — “अपने बेटे से पूछ लो।”
बूढ़ी मां ने अपने बेटे से पूछा, तो बेटे ने कहा — “मां, धन मांग लो।” फिर बहू से पूछा तो उसने कहा — “सासूजी, पोता मांग लेना।” बूढ़ी मां ने सोचा कि दोनों अपनी-अपनी इच्छा के मुताबिक मांग रहे हैं, इसलिए वह पड़ोसन के पास गई। पड़ोसन ने कहा — “पगली! क्यों धन मांग रही हो? क्यों पोता मांग रही हो? जिंदगी तो थोड़ी सी है, अपनी सुंदर काया मांग लो।”
घर आकर बूढ़ी मां ने सोचा कि बेटा-बहू भी खुश हों, इसलिए उनकी भी माननी चाहिए। अगले दिन गणेश जी आए और बोले — “बूढ़ी मां! कुछ मांगो।”
बूढ़ी मां ने कहा — “मुझे सुंदर काया दो, सोने के कटोरे में पोते को दूध पीता देखूं, अमर सुहाग दो, निरोगी काया दो, भाई दो, भतीजे दो, पूरा परिवार दो, सुख दो और मोक्ष दो।”
गणेश जी बोले — “बूढ़ी मां! तुमने तो मुझे धोखा दे दिया। सब कुछ मांग लिया। अब जैसा कहा है वैसा ही होगा।” और वे अचानक गायब हो गए।
अब बूढ़ी मां के यहां सब कुछ वैसा ही हो गया। हे गणेश जी महाराज! जो कुछ आपने बूढ़ी मां को दिया, वैसा सभी को भी दें।
Ahoi Ashtami 2025 LIVE: बैंगलुरु, पटना, हैदराबाद और जयपुर में कब दिखेंगे तारे
बैंगलुरु- शाम 06 बजकर 17 मिनट
पटना- शाम 06 बजकर 09 मिनट
हैदराबाद-शाम 06 बजकर 17 मिनट
जयपुर- शाम 06 बजकर 20 मिनट
अहोई अष्टमी पर दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम में किस समय निकलेंगे तारे (Ahoi Ashtami 2025 Star rise)
नई दिल्ली- शाम 06 बजकर 17 मिनट
नोएडा- शाम 06 बजकर 20 मिनट
गुरुग्राम- शाम 06 बजकर 20 मिनट
अहोई अष्टमी पर करें सिंघाड़े का दान
अहोई अष्टमी व्रत पर सिंघाड़े का विशेष महत्व है। इस दिन सिंघाड़े का दान करने से सुख-समृद्धि आती है।
अहोई अष्टमी पर लगाएं सिंघाड़े का भोग (Ahoi Ashtami 2025 Bhog)
अहोई अष्टमी व्रत पर सिंघाड़े का विशेष महत्व है। अहोई माता को सिंघाड़ा चढ़ाने से संतान का स्वास्थ्य अच्छा रहती है।
अहोई माता को लगाएं ये भोग (Ahoi Ashtami 2025 Bhog)
अहोई अष्टमी के दिन माता को कढ़ी-चावल का भोग लगाना शुभ माना जाता है, क्योंकि ये एक सात्विक भोजन है। इसके अलावा आप कढ़ी-चावल गरीब या जरूरतमंद को खिला सकती है। इससे संतान को खुशहाली मिलती है।
अहोई अष्टमी पर करें नारियल का दान (Ahoi Ashtami 2025 Upay)
अहोई अष्टमी के दिन माता की कृपा पाने के लिए किसी गरीब, जरूरतमंद को सात नारियल का दान करें। ऐसा करने से सुख-समृद्धि, धन-वैभव की प्राप्ति होती है।
माता अहोई की पूजा करते समय बोले ये मंत्र (Ahoi Ashtami 2025 Mantra)
अहोई अष्टमी पर माता अहोई की विधिवत पूजा करने के साथ इस मंत्र का जाप करना शुभ होगा
अहोई माता नमः।
अहोई माता सर्वदुख नाशिनि, सुख-समृद्धि प्रदायिनी नमः।
पुत्र-पौत्रादि सुखं देहि, सौभाग्यं देहि, धनं देहि, श्रीं देहि नमः॥
जानें आपके शहर में किस समय दिखेंगे चांद और तारे (Ahoi Ashtami 2025 Star Rise Time)
पंचांग के अनुसार, इस साल अहोई अष्टमी पर तारे निकलने का समय शाम 7 बजकर 32 मिनट तक है। हालांकि भारत के अलग-अलग शहरों में विभिन्न समय पर तारा दिखाई देगा।
अहोई अष्टमी पर न करें ये काम
अहोई अष्टमी का व्रत निर्जला रखा जाता है। इसलिए आज जल बिल्कुल भी न ग्रहण करें।
अहोई अष्टमी के दिन व्रत के दिन रात को जागना शुभ माना जाता है।
आज के दिन किसी न किसी से वाद-विवाद न करें।
आज किसी भी प्रकार का झूठ बोलने से बचना चाहिए।
आज मांस-मदिरा का सेवन बिल्कुल भी न करें।
अहोई अष्टमी का व्रत रखने वाले लोग किसी भी प्रकार के अशुद्ध जगह पर न बैठे।
अहोई अष्टमी व्रत की पूजा विधि (Ahoi Ashtami 2025 Puja Vidhi)
अहोई अष्टमी का व्रत करवा चौथ की तरह ही अत्यंत कठोर और महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपनी संतान की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और परिवार के कल्याण के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। शाम के समय विधि-विधानपूर्वक पूजा करने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है।
पूजन का शुभ समय प्रदोष काल माना गया है। इस दौरान चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर माता अहोई की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। इसके बाद जल का छिड़काव किया जाता है, दीप जलाया जाता है और श्रद्धापूर्वक मंत्रोच्चारण के साथ अहोई माता की पूजा-अर्चना संपन्न की जाती है।
अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त (Ahoi Ashtami 2025 LIVE)
अहोई अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त- शाम 5 बजकर 53 मिनट से शाम 7 बजकर 08 मिनट तक
अहोई अष्टमी पर करें तारों की पूजा
अहोई अष्टमी को शाम के समय आकाश में दिखाई देने वाले तारों की पूजा करें और अहोई माता का स्मरण करते हुए व्रत का पारण करें।
