परिवार में माता-पिता की भूमिका बेहद खास होती है। बहुत कम ऐसे अभिभावक हैं जो ये जानते होंगे कि अपने बच्चों को पालने के सबसे अच्छा तरीका क्या है। बच्चों को संस्कारवान बनाने के लिए हर माता-पिता भरपूर मेहनत कहते हैं। लेकिन इसके बावजूद भी यदि किसी को 4 बच्चे हैं तो भी वे सीख ही रहे होते हैं। इनमें से यदि तीन को अच्छे से पाला और संस्कारित किया लेकिन चौथा दिन में तारे दिखा सकता है। खैर, क्या आप यह जानते हैं कि माता-पिता को अपने बच्चों के सामने कैसा व्यवहार करना चाहिए? यदि नहीं, तो आगे हम प्रवचनकर्ता सुधांशु जी महाराज के प्रवचन इस प्रवचन से इसे जानते हैं।

सुधांशु जी महाराज अपने प्रवचन में कहते हैं कि अपने बच्चों के सामने जो पति-पत्नी लड़ते रहते हैं उनके बच्चे बहुत अच्छे से बिगड़ते हैं। साथ ही बच्चे कभी उनकी इज्जत नहीं करते हैं। प्रवचन में आगे वे कहते हैं कि पत्नी, पति के बारे में भला-बुरा अपने बच्चों के सामने बोले और बच्चों को पकड़कर उसकी मां के बारे में भला-बुरा कहे तो ऐसे में बच्चे समझ जाते हैं की दोनों क्या हैं। साथ ही बच्चे ये भी समझ जाते हैं कि दोनों के सामने कैसा व्यवहार करना है। तब माता-पिता ही कहते हैं कि बच्चे उनकी इज्जत नहीं करते हैं।

प्रवचन में आगे सुधांशु जी महाराज कहते हैं कि अपने बच्चों को मां डांटे और कहे कि अपने पिता से बात करने का ढंग होना चाहिए तुम्हें। इस पर बच्चा कहता है कि तुम भी तो आपस में लड़ते हो। इस पर माता कहती है कि हमलोगों में कोई लड़ाई नहीं होती है। आगे सुधांशु जी महाराज माता-पिता को सलाह देते हैं कि अपने घर में कहल-झगड़े आदि को जगह नहीं देना चाहिए। साथ ही घर का एक कोना वो रखना चाहिए यहां बैठकर परमात्मा को पुकार सके।