ज्येष्ठ हिंदू पंचाग के अनुसार चंद्र मास का तीसरा महीना होता है। यह चैत्र और वैशाख मास के बाद आता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह मास अक्सर मई और जून के महीने में पड़ता है। जैसा कि सभी चंद्र मासों के नाम नक्षत्रों पर आधारित हैं। वैसा ही ज्येष्ठ माह भी ज्येष्ठा नाम के नक्षत्र पर आधारित है। मान्यता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन चंद्रमा ज्येष्ठा नक्षत्र में होता है। इसलिए इसी कारण इस माह का नाम ज्येष्ठ रखा गया है।
ज्येष्ठ माह के व्रत व त्यौहार
वैसे तो ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में तो कोई खास पर्व नहीं है। परंतु शुक्ल पक्ष में जल के महत्व को बताने वाले दो महत्वपूर्ण त्यौहार गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी पड़ते हैं। गंगा नदी का महत्व बहुत अधिक माना जाता है। क्योंकि गुणों के मामले में गंगा नदी का स्थान सर्वोपरि माना गया है। इसलिए इस माह में जल की प्रधानता दी गई है। आगे जानते हैं ज्येष्ठ मास के व्रत और त्योहार।
अपरा एकादशी- एकादशी तो सभी पावन मानी जाती हैं लेकिन ज्येष्ठ मास की कृष्ण एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की उपासना की जाती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार अपरा एकादशी का त्यौहार 30 मई को है।
ज्येष्ठ अमावस्या- ज्येष्ठ अमावस्या की तिथि बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसका एक कारण तो यह है कि अमावस्या तिथि पूर्वजों की शांति के दान-तर्पण आदि के लिये बहुत ही शुभ मानी जाती है। दूसरा ज्येष्ठ अमावस्या का महत्व इसलिये बढ़ जाता है क्योंकि इसी दिन शनिदेव की जयंती मनाई जाती है तो वहीं वट सावित्री का व्रत भी ज्येष्ठ अमावस्या को ही रखा जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या 3 जून को है।
गंगा दशहरा- गंगा दशहरा का त्यौहार ज्येष्ठ मास में मनाया जाने वाला विशेष त्यौहार है। यह त्यौहार मोक्षदायिनी मां गंगा के महत्व को बतलाता ही है साथ ही जल के सरंक्षण का संदेश भी देता है। गंगा दशहरा ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह पर्व 12 जून को है।
निर्जला एकादशी- निर्जला एकादशी का उपवास काफी कठिन होता है। इस दिन जल की एक बूंद तक व्रती को ग्रहण नहीं करनी होती साथ ही उसे दूसरों को जल पिलाना होता है। सब्र संतोष और जल संरक्षण सहित जल के महत्व को समझने का यह उपवास ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को रखा जाता है। निर्जला एकादशी सभी एकादशियों में श्रेष्ठ मानी जाती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार निर्जला एकादशी का उपवास 13 जून को है। इसी तिथि को गायत्री जयंती भी मनाई जाती है।
ज्येष्ठ पूर्णिमा/ वट पूर्णिमा व्रत/ कबीरदास जयंती- वट पूर्णिमा व्रत, वट सावित्री व्रत की तरह ही है। इस दिन भी विवाहित महिलाएं सुख समृद्धि और अपने पति की दीर्घायु के लिये उपवास रखती हैं लेकिन वट पूर्णिमा व्रत मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के राज्यों में यह ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। जबकि उत्तर भारत के राज्यों में यह ज्येष्ठ अमावस्या को वट सावित्री व्रत के रूप में मनाया जाता है। वट पर्णिमा का व्रत 16 जून को रखा जाएगा। हालांकि 17 जून को भी ज्येष्ठ पूर्णिमा मनाई जाएगी। बता दें कि इसी दिन भक्तिकाल के प्रमुख संत कबीरदास जी की जयंती भी मनाई जाती है।
