प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में अच्छे और बुरे समय आते हैं। अच्छे समय की तो चर्चा सबलोग करते हैं लेकिन बुरे समय के बारे में प्रायः सभी चर्चा करते हैं। अक्सर लोग कहते हैं कि मेरा समय बहुत खराब चल रहा है, समझ नहीं आ रहा कि क्या किया जाए। कैसे अपने बुरे समय को अच्छे समय बदलूं। लेकिन सच तो ये है कि दो चीजें ऐसी हैं जिसे बुरे समय में करने चाहिए। भगवान श्री कृष्ण ने गीता में बुरे समय के लिए क्या कहा ह, इसे आज हम जानेंगे। आगे हम इसे एक कहानी के माध्यम से जानते हैं।
एक बहुत ही गरीब किसान था। वह था तो बहुत गरीब लेकिन मेहनती और खुश था। वह रोज सुबह उठकर मंदिर में जाकर केवल 10 मिनट भगवान के आगे हाथ जोड़कर प्रार्थना कारता था। उस किसान की पत्नी भी हर रोज उसके साथ मंदिर जाती थी। प्रार्थना करके वह सारा दिन अपने खेतों में काम करता। उसका जीवन बहुत अच्छा चल रहा था। अपनी मेहनत से वह कुछ ज्यादा तो नहीं कमा पाता था लेकिन फिर भी जितना भी कमाता था उसमें से कुछ पैसे लोगों की भलाई में लगा देता था। एक उस किसान के गाँव में बीमारी फैल गई। किसान का एकलौता बेटा बीमार पड़ गया। किसान के गाँव में इस बीमारी की इलाज के लिए कोई अच्छा डॉक्टर नहीं था। पास के शहर में उस बालक को ले जाया गया।
शहर के इस अस्पताल का इलाज बहुत ही मंहगा था। उस बेचारे किसान के लिए अस्पताल और डॉक्टर का खर्चा आदि दे पाना बहुत ही मुश्किल था। किसान दिन प्रतिदिन हिम्मत हारता जा रहा था। एक दिन अस्पताल में बैठे-बैठे वह इतना हताश हो गया कि वो जोर-जोर से रोने लगा। साथ ही कहने लगा- पता नहीं किस चीज का बदला भगवान मुझसे ले रहे हैं। कभी वह खुद को कोसता तो कभी भगवान को लेकिन किसान की पत्नी को भगवान पर अटूट विश्वास था। लेकिन किसान को आशा की कोई किरण नजर नहीं आ रही थी।
अस्पताल के कुछ दूरी पर ही मंदिर था। किसान की पत्नी हर रोज उस मंदिर में प्रार्थना करने जाती थी। लेकिन किसान का मन प्रार्थना करने का नहीं करता था। डॉक्टर न उस किसान से कहा- बच्चे के इलाज के लिए दस हाजर रुपए की आवश्यकता है। पर किसान के लिए इतनी बड़ी रकम इकट्ठा कर पाना मुश्किल था। किसान की पत्नी अब भी मंदिर जाती थी। वह भगवान के आगे हाथ जोड़कर प्रार्थना करती कि उसका पुत्र ठीक हो जाए। एक दिन मंदिर में एक सेठ आया। उसने किसान की पत्नी को कहा कि उसने किसान की बात उस दिन अस्पताल में सुनी थी।
सेठ को बातों ही बातों में पता चला कि किसान को दस हजार रुपए की जरुरत है। इस पर सेठ ने अपनी जेब से दस हजार निकालकर देते हुए बोला कि उसके पास इतने रुपए ही हैं। साथ ही सेठ ने कागज पर अपना पता लिखते हुए कहा- अगर उनको और पैसों की आवश्यकता हो तो वे बेहिचक मांग लें। महिला ने उत्तर दिया इस कागज की कोई आवश्यकता नहीं है। वो जानती है कि ये पैसे उसको किसने भेजवाए हैं। जिसने उसे ये पैसे दिए हैं वह परमात्मा उसका हमेशा ख्याल रखेंगे। इस कहते हैं अटूट विश्वास। ये सबसे जरुरी चीज हैं जिसे हम अक्सर खो देते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण गीता के नौवें अध्याय के 22 वें श्लोक में कहा है कि जो मनुष्य मेरे पर मन लगाते हैं, मेरा ध्यान करते हैं। मैं उनको वो प्रदान करता हूं जो उनके पास नहीं है। साथ ही जो उनके पास है मैं उनकी रक्षा भी करता हूं। इसलिए यह बहुत जरुरी है कि हम अपने बुरे वक्त में परमात्मा पर भरोसा रखें। इसके अलावा गीता के दूसरे अध्याय के 14 वें श्लोक में कहा है कि सुख और दुख का भाव इंद्रियों से निकलता है। ये मौसम के समान है। यानि ये सुख और दुख दोनों ही हमेशा नहीं रहेंगे। इसलिए हमें सुख और दुख का समान भाव से सामना करना चाहिए।
