चाणक्य नीति महान आचार्य चाणक्य द्वारा लिखी गई एक महान ग्रंथ है जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना की पहले था। चाणक्य नीति में कुल सत्रह अध्याय हैं जिसके नवमें अध्याय में आचार्य चाणक्य ने व्यावहारिक जीवन की कुछ ऐसी बातों को बताया है जिससे कोई भी इंसान खुद को अलग नहीं कर सकता है। ये बातें प्रायः हर आम और खास व्यक्ति के जीवन में होती हैं। आचार्य चाणक्य ने बताया है कि कुछ ऐसी गुप्त बातें हैं जिसे उजागर करने वाला नीच होता है। साथ ही उसका हश्र कुछ इस प्रकार होता है। आगे जानते हैं इसे।

आचार्य चाणक्य ने कहा है कि यदि मुक्ति चाहते हो तो समस्त सांसरिक विषय-वासनाओं को विश के समान छोड़ दो और क्षमाशीलता, नम्रता, दया, पवित्रता और सत्यता को अमृत के समान पीयो यानि अपनाओ। जो नीच व्यक्ति परस्पर की गई गुप्त बातों को दूसरों से कह देते हैं वे ही दीमक के घर में रहने वाले सांप की भांति नष्ट हो जाते हैं। ब्रह्मा को शायद कोई बताने वाला नहीं मिला जो कि उन्होंने सोने में सुगंध, ईंख में फल, चंदन में फूल विद्वान को धनी और राजा को चिरंजीवी नहीं बनाया। सभी औषधियों में अमृत प्रधान है। सभी सुखों में भोजन प्रधान है, सभी इंद्रियों में आंख प्रधान है। साथ ही सारे शरीर में सिर श्रेष्ठ हैं। न तो आकाश में कोई दूत गया न इस संबंध में पहले किसी से बात हुई। न पहले इसे किसी ने बनाया और न कोई प्रकरण ही आया। तब भी आकाश में भ्रमण करने वाले चन्द्र और सूर्य-ग्रहण के बारे में जो ब्राह्मण पहले ही जान लेता है वो विद्वान क्यों नहीं है? अर्थात वास्तव में वो विद्वान है जिनकी गणना से ग्रहों की चाल का सही-सही पता लगाया जा सकता है।

विद्यार्थी, नौकर, पथिक भूख से व्याकुल, भाय से त्रस्त, भंडारी और द्वारपाल इन सातों को सोता हुआ देखें तो तत्काल जागा देना चाहिए। क्योंकि अपने कर्मों और कर्तव्यों का पालन ये जागकर अर्थात सचेत होकर ही करते हैं। सांप, राजा, सिंह, ततैया, बालक, दूसरे का कुत्ता और मूर्ख व्यक्ति इन सातों को सोते से नहीं जगाना चाहिए। इसके अलावा धन के लिए वेद पढ़ाने वाले और शूद्रों के अन्न को खाने वाले ब्राह्मण विषहीन सांप की भांति कुछ नहीं कर पाते। सुबह के समय जो आर्यों की कथा से जो कि महाभारत की कथा से है, दोपहर का समय स्त्री प्रसंग से, रामायण की कथा से और रात में चोर की कथा से जो कि गीता की कथा से है, बुद्धिमान लोग अपना समय बिताते हैं।