शनि ग्रह को नियंत्रित करने के लिए घोड़े की नाल का प्रयोग किया जाता है। ज्योतिष के अनुसार शनि दोष को दूर करने के लिए घोड़े की नाल पहनने की सलाह दी जाती है। बहुत से लोग शनि दोष से मुक्ति पाने के लिए इसका प्रयोग भी करते हैं। क्या आप जानते हैं कि आखिर घोड़े की नाल का शनि ग्रह से क्या संबंध है? साथ ही किस प्रकार घोड़े की नाल से शनि शनि दोष दूर हो जाते हैं? यदि नहीं तो आगे जानते हैं कि आखिर क्यों और कैसे घोड़े की नाल से शनि नियंत्रित हो जाते हैं? क्यों होता है ऐसा?

ज्योतिष में शनि को गति, संघर्ष और मेहनत का ग्रह माना जाता है। यही गुण घोड़े की नाल में भी पाया जाता है। बार-बार जमीन से रगड़ खाने की वजह से घोड़े की नाल के जीवन में संघर्ष रहता है। घोड़े की जो नाल है वह घोड़े के पैर में लगे रहने के कारण गतिशील अवस्था में रहती है। यह बार-बार जमीन से घिसती-टकराती है और रगड़ खाने की वजह से घोड़े की नाल के अंदर चुंबकीय प्रभाव आ जाता है।

इसी चुंबकीय प्रभाव के कारण ही घोड़े की नाल शनि को नियंत्रित कर पाती है। अगर कोई नई घोड़े की नाल हो जो कभी घिसी हुई न हो तो उससे कोई फायदा नहीं होता है। जो नाल घोड़े के पैरों से निकाली गई हो और रगड़ खाकर एकदम पुरानी हो गई हो, ऐसे ही नाल का प्रयोग करने से फायदा हो सकता है। क्योंकि ऐसे ही नाल के अंदर चुंबकीय प्रभाव पाया जाता है।