Panchang 18 April 2020, Aaj Ka Panchang (Today Panchang): आज बरूथिनी एकादशी है। जो हर साल वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को आती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। कहा जाता है कि इस एकादशी व्रत को रखने से सभी प्रकार के पापों का नाश हो जाता है और जीवन में सुख और शांति आती है। जानिए आज का पूरा पंचांग एकादशी व्रत के पारण मुहूर्त समेत…
एकादशी व्रत मुहूर्त (Ekadashi Vrat Muhurat):
एकादशी तिथि प्रारम्भ – अप्रैल 17, 2020 को 08:03 पी एम बजे
एकादशी तिथि समाप्त – अप्रैल 18, 2020 को 10:17 पी एम बजे
19 अप्रैल को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय – 05:35 ए एम से 08:08 ए एम
पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय – 12:42 ए एम, अप्रैल 20
आज का पंचांग (Panchang 18 April 2020):
सूर्योदय – 05:36 ए एम
सूर्यास्त – 06:18 पी एम
चन्द्रोदय – 03:36 ए एम, अप्रैल 19
चन्द्रास्त – 02:28 पी एम
शक सम्वत- 1942 शर्वरी
विक्रम सम्वत- 2077 प्रमाथी
अमांत महीना – चैत्र
पूर्णिमांत महीना – वैशाख
वार- शनिवार
पक्ष- कृष्ण पक्ष
तिथि – एकादशी – 10:17 पी एम तक
नक्षत्र – शतभिषा – 04:25 ए एम, अप्रैल 19 तक
योग – शुक्ल – 06:43 पी एम तक
करण – बव – 09:08 ए एम तक
द्वितीय करण – बालव – 10:17 पी एम तक
सूर्य राशि – मेष
चन्द्र राशि – कुम्भ
आज के शुभ मुहूर्त (Aaj Ka Shubh Samay):
अभिजित मुहूर्त- 11:32 ए एम से 12:23 पी एम, अमृत काल – 08:22 पी एम से 10:10 पी एम, त्रिपुष्कर योग- 04:25 ए एम, अप्रैल 19 से 05:35 ए एम, अप्रैल 19 तक, विजय मुहूर्त – 02:04 पी एम से 02:55 पी एम, गोधूलि मुहूर्त- 06:06 पी एम से 06:30 पी एम, ब्रह्म मुहूर्त- 04:05 ए एम, अप्रैल 19 से 04:50 ए एम, अप्रैल 19 तक, सायाह्न सन्ध्या – 06:18 पी एम से 07:26 पी एम तक, निशिता मुहूर्त- 11:34 पी एम से 12:19 ए एम, अप्रैल 19 तक, प्रातः सन्ध्या – 04:28 ए एम, अप्रैल 19 से 05:35 ए एम, अप्रैल 19 तक।
आज के अशुभ मुहूर्त (Today Ashubh Muhurat): राहुकाल- 08:47 ए एम से 10:22 ए एम, गुलिक काल- 05:36 ए एम से 07:12 ए एम, यमगण्ड- 01:33 पी एम से 03:08 पी एम, दुर्मुहूर्त -05:36 ए एम से 06:27 ए एम, दुर्मुहूर्त – 06:27 ए एम से 07:18 ए एम, वर्ज्य – 09:39 ए एम से 11:26 ए एम तक, पंचक- पूरे दिन।
निवास और शूल: होमाहुति- राहु – 04:25 ए एम, अप्रैल 19 तक फिर केतु, दिशा शूल – पूर्व, राहु वास- पूर्व, अग्निवास-पाताल – 10:17 पी एम तक फिर पृथ्वी, चन्द्र वास – पश्चिम।

