Panchang 11 April 2020, Aaj Ka Panchang (Today Panchang): आज विकट संकष्टी चतुर्थी है। इस दिन भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए व्रत रखा जाता है। माना जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और संतान सुख की प्राप्ति होती है। हर महीने में संकष्टी चतुर्थी (Sakat Chauth) व्रत आता है। लेकिन वैशाख (Vaisakh Chauth) माह में आने वाली संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व माना गया है। यहां देखें इसका मुहूर्त और आज का पूरा पंचांग…
संकष्टी चतुर्थी/सकट चौथ मुहूर्त (Sankashti Chaturthi/Sakat Chauth Puja Time):
विकट संकष्टी चतुर्थी शनिवार, अप्रैल 11, 2020 को
संकष्टी के दिन चन्द्रोदय – 10:00 पी एम
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ – अप्रैल 10, 2020 को 09:31 पी एम बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त – अप्रैल 11, 2020 को 07:01 पी एम बजे
आज का पंचांग (Panchang 11 April 2020):
सूर्योदय – 05:43 ए एम
सूर्यास्त – 06:15 पी एम
चन्द्रोदय – 10:00 पी एम
चन्द्रास्त – 08:11 ए एम
शक सम्वत- 1942 शर्वरी
विक्रम सम्वत- 2077 प्रमाथी
अमांत महीना – चैत्र
पूर्णिमांत महीना – वैशाख
वार- शनिवार
पक्ष- कृष्ण पक्ष
तिथि – चतुर्थी – 07:01 पी एम तक
नक्षत्र – अनुराधा – 08:12 पी एम तक
योग – व्यतीपात – 11:21 पी एम तक
करण – बव – 08:11 ए एम तक
द्वितीय करण – बालव – 07:01 पी एम तक
सूर्य राशि – मीन
चन्द्र राशि – वृश्चिक
आज के शुभ मुहूर्त (Aaj Ka Shubh Samay):
अभिजित मुहूर्त- 11:34 ए एम से 12:24 पी एम, अमृत काल – 10:32 ए एम से 12:01 पी एम, विजय मुहूर्त – 02:04 पी एम से 02:55 पी एम, गोधूलि मुहूर्त- 06:03 पी एम से 06:27 पी एम, ब्रह्म मुहूर्त- 04:10 ए एम, अप्रैल 12 से 04:56 ए एम, अप्रैल 12 तक, सायाह्न सन्ध्या – 06:15 पी एम से 07:24 पी एम, निशिता मुहूर्त- 11:36 पी एम से 12:21 ए एम, अप्रैल 12 तक, प्रातः सन्ध्या – 04:33 ए एम, अप्रैल 12 से 05:42 ए एम, अप्रैल 12 तक।
आज के अशुभ मुहूर्त (Today Ashubh Muhurat): राहुकाल- 08:51 ए एम से 10:25 ए एम, गुलिक काल- 05:43 ए एम से 07:17 ए एम, यमगण्ड- 01:33 पी एम से 03:07 पी एम, दुर्मुहूर्त -05:43 ए एम से 06:33 ए एम, दुर्मुहूर्त – 06:33 ए एम से 07:23 ए एम, वर्ज्य – 01:34 ए एम, अप्रैल 12 से 03:06 ए एम, अप्रैल 12 तक, गण्ड मूल – 08:12 पी एम से 05:42 ए एम, अप्रैल 12 तक।
निवास और शूल: होमाहुति- मंगल – 08:12 पी एम तक फिर गुरु, दिशा शूल – पूर्व, राहु वास- पूर्व, अग्निवास- पृथ्वी – पृथ्वी, चन्द्र वास – उत्तर।

