राजीव जैन
राजस्थान में भारी घाटे से जूझ रही रोडवेज के श्रमिक और कर्मचारी अब अपने रोजगार को बचाने की मुहिम में जुट गए हैं। रोडवेज प्रशासन के कुप्रबंधन के कारण रोडवेज के श्रमिकों को वेतन, पेंशन और भत्तों का ही टोटा पड़ गया है। मजदूर संगठन अब रोडवेज बचाओ-रोजगार बचाओ आंदोलन चला रहे हैं। प्रदेश के इस सबसे बड़े सरकारी उपक्रम की दुर्दशा की जिम्मेदारी पूरी तरह से सरकारी लापरवाही है। इस संस्थान का घाटा साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए पार कर गया है। मजदूरों का वेतन चुकाने के लिए सरकार अब इसकी जमीन बेचना चाहती है। रोडवेज के सभी श्रमिक संगठनों ने संयुक्त संघर्ष मोर्चा बना लिया है और अपने हकों को पाने के लिए लंबे आंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं।
बंद होने के कगार पर पहुंची रोडवेज के दस हजार से ज्यादा कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट भी खड़ा होने के आसार है। इसे लेकर ही श्रमिक और कर्मियों ने आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। एटक, सीटू, इंटक और अवकाश प्राप्त कर्मियों के संगठनों ने रोडवेज बचाने के लिए साझा तौर पर आंदोलन भी शुरू किया है। रोडवेज के मजदूर नेता और एटक के प्रदेश अध्यक्ष एमएल यादव का कहना है कि रोडवेज को बचाना ही उनका मुख्य मकसद है। रोडवेज बचेगी तो उनका रोजगार भी बचेगा। श्रमिकों की मांगों की लगातार अनदेखी के कारण ही कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। श्रमिकों की जनवरी 2017 से 4 फीसद, जुलाई 2017 से 3 फीसद और जनवरी 2018 से 3 फीसद की दर से महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की जायज मांग को भी प्रशासन नहीं मान रहा है। श्रमिकों का 2013 से ही बोनस और एक्सग्रेसिया बकाया चल रहा है। रोडवेज के मई 2014 से अब तक रिटायर हुए करीब चार हजार कर्मचारियों को सात सौ करोड़ रुपए का बकाया चल रहा है। रिटायर कर्मचारियों को पेंशन के लाले पड़ गए हैं। सरकार अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के मकसद से लोक परिवहन सेवा को बढ़ावा दे रही है और उनकी बसों को रोडवेज बस अड्डों से संचालन की अनुमति देना ही साफ करता है कि देश के इस बेहतरीन परिवहन निगम को बंद करने की तैयारी की जा रही है।
प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में आवागमन के लिए रोडवेज ने अपनी बसों का पूरा जाल बिछा दिया था। इसके प्रदेश भर में 40 डिपो हैं और उनमें बसों की मरम्मत के लिए वर्कशाप भी हैं। रोडवेज का तमाम प्रशासन सरकार के बड़े आइएएस और आरएएस अफसर संभालते हैं और उन्होंने कभी भी इसके घाटे को दूर करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। सरकार ने यात्री परिवहन में अब निजीकरण की नीति अपना ली है। इसके कारण प्रदेश में बड़ी संख्या में लोक परिवहन के तहत निजी बसों को परमिट जारी किए गए हैं। रोडवेज कर्मचारियों ने दबाव बनाने के लिए जो आंदोलन की तैयारी की है उसके हिसाब से आगामी 13 मई को श्रमिक विरोधी नीतियों के लिए सरकार के पुतले फंूके जाएंगे और 5 जुलाई को जयपुर में प्रदेश स्तरीय रैली निकाली जाएगी। इसके बावजूद मांगें नहीं मानी गईं तो 25 और 26 जुलाई को बसों का चक्का जाम होगा।
