कानपुर एनकाउंटर के मुख्य अभियुक्त विकास दुबे को उत्तर प्रदेश पुलिस ने शुक्रवार को एनकाउंटर में मार गिराया। जरायम की दुनिया में बड़ा नाम बन चुके विकास दुबे को आखिरी वक्त में कंधा देने के लिए कोई नहीं था। जरायम की दुनिया में वो इतना आगे निकल चुका था कि दूर-दूर तक उसके अपने उसके पास नहीं थे।
विकास की मां ने पहले ही उससे नाता तोड़ लिया था अब उसके पिता ने भी विकास की मौत को सही ठहराया है। विकास के पिता का कहना है कि “हमें किसी ने बताया कि हमारा बेटा मारा गया है हमने कहा ठीक किया गया।(सवाल-क्या आप उसके अंतिम संस्कार पर जाएंगे?) मैं उसके अंतिम संस्कार पर क्यों जाऊं। हमारा कहा वो मानता तो आज इस दशा को क्यों प्राप्त होता। उसने हमारी कभी मदद नहीं की।”
हथियार के दम पर विकास अपनी मनचाही चीजें जीतता तो गया लेकिन इस दौरान उसके अपने रिश्ते पीछे छूट गए। विकास दुबे का शव का शाम सवा सात बजे भैरव घाट विद्युत शवदाह गृह पहुंचा, वहीं अंतिम संस्कार हुआ। इस दौरान विकास दुबे का सिर्फ एक रिश्तेदार अंतिम संस्कार में पहुंचा। विकास दुबे की मां सरला देवी का कहना है कि उनके बेटे से उनका कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने अपने अपराधी बेटे का शव लेने से इंकार कर दिया। विकास की मां ने कानपुर आने से ही मना कर दिया। वह लखनऊ में ही हैं। देर शाम विकास का शव उसके बहनोई दिनेश तिवारी को सौंप दिया गया।
विकास के अपराध और निर्ममता का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि उसकी मौत के बाद बिकरू गांव में जश्न का माहौल है। लोगों का कहना है कि बिकरू गांव आज आजाद हो गया।
बता दें कि विकास के एनकाउंटर को लेकर पुलिस ने प्रेस रिलीज जारी की है। पुलिस ने बताया कि जिस गाड़ी में विकास दुबे बैठा था उसके सामने भैंसों का झुंड आ गया था जिसके बाद ड्राइवर ने बचाने के लिए गाड़ी मोड़ी जिससे गाड़ी अनियंत्रित होकर पलट गई। इस दौरान पुलिसकर्मी थके हुए थे। विकास ने मौका देखकर पुलिसकर्मी का हथियार छीनकर भागने की कोशिश की। उसे रोकने की कोशिश की गई तो उसने पुलिस पर गोलियां चलाईं जिसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में उसे मार गिराया।
