भारी बारिश और बाढ़ के कहर से देश के कई हिस्सों में जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित है। लाखों की संख्या में लोग अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर है, जो लोग में घर में फंसे हैं उनके सामने भी कई समस्याएं खड़ी है। बाढ़ के कारण जनजीवन की क्या हालत है, यह यूपी के बुंदेलखंड, वाराणसी और इलाहाबाद में देखने को मिला। तबाही का आलम यह रहा कि बुंदेलखंड के बांदा जिले में दो महिलाओं की डिलीवरी बोट (नाव) पर हुई। बाद में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक दोनों महिलाओं की डिलीवरी नॉर्मल रही। एक महिला ने लड़के को तो दूसरी ने बच्ची को जन्म दिया। बता दें कि बाढ़ और बारिश की मार झेल रहा यह वही क्षेत्र (बुंदेलखंड) है जिसके सूखे का मुद्दा हर बार संसद और विधानसभा में उठता रहा है। हालांकि इस बार बारिश होने से लोगों को राहत मिली थी, लेकिन बाढ़ ने उनकी इस उम्मीद को धूमिल कर दिया।
वहीं देश के पवित्र स्थानों में शुमार किए जाने वाले वाराणसी में भी भारी बारिश के कारण गंगा खतरे के निशान से ऊपर है। जिसके कारण लोगों के सामने अंतिम संस्कार करने तक की समस्या खड़ी हो गई है। बाढ़ के कारण वाराणसी में गंगा का पानी घाटों के ऊपर तक आ गया है। अंतिम संस्कार के लिए जगह उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते लोग घाट के पास बनी पुरानी हवेलियों और घरों की छत पर अंतिम संस्कार करने के लिए मजबूर है। कुछ ऐसा ही हाल संगम नगरी इलाहाबाद का भी है। जानकारी के मुताबिक लोग यहां गलियों में चिताएं (अंतिम संस्कार) जलाने के लिए मजबूर है।

बता दें कि भारी बारिश और बाढ़ के कारण यूपी-बिहार समेत देश के कई हिस्से बुरी तरह से प्रभावित है। इस समस्या को लेकर मंगलवार को बिहार की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पीएम मोदी से मुलाकात भी की। साथ ही उनसे विशेषज्ञों की टीम भेजने की बात कही है। बाढ़ और भारी बारिश से प्रभावित राज्यों में नेशनल डिजास्टर रिसपॉन्स टीम (NDRF) की कुल 56 टीमें बचाव और राहत कार्य में जुटी है। बिहार और उत्तर प्रदेश की स्थिति पर नजर रखने के लिए दो डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल रैंक के अधिकारियों को लगाया गया है।

