अगले साल उत्तर प्रदेश होने जा रहे विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने गुरुवार को अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा कर दी। पिछले कई विधानसभा चुनाव हारने के बाद पार्टी ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। इस बार युवा नेताओं की जगह पुराने और अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के लिए कांग्रेस ने 78 साल की शीला दीक्षित का नाम पर मोहर लगाई है। दिसंबर 2015 में दिल्ली चुनाव हारने के बाद से राजनीतिक चर्चा से बाहर चल रही शीला दीक्षित को एक बार फिर कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में चेहरा बनाया है। पिछले हफ्ते मीडिया से बात करते हुए शीला ने कहा था कि वो पार्टी के आदेशानुसार काम करेंगी। उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए कांग्रेस के रणनीतिकार बने प्रशांत किशोर मानते हैं कि शीला दीक्षित के चेहरा बनाए जाने से राज्य के ब्राह्मण वोटर्स एक बार फिर कांग्रेस के पाले में आ सकते हैं।
वहीं पार्टी ने प्रचार कमेटी की जिम्मेदारी 64 साल के संजय सिंह को सौंपी है। संजय सिंह पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी की संसदीय क्षेत्र अमेठी के शाही परिवार से आते हैं। वैसे संजय सिंह अतीत में दो बार पार्टी बदल कर बीजेपी का भी दामन थाम चुके हैं। पार्टी की रणनीति है कि ठाकुर होने के नाते संजय सिंह चुनाव में स्वर्ण वोट दिलवाने में सहायक हो सकते हैं।
इससे एक दिन पहले बुधवार को 64 साल के राज बब्बर को उत्तर प्रदेश का पार्टी अध्यक्ष बनाया गया है। एक जाने माने अभिनेता होने के नाते पार्टी को उम्मीद है कि राज बब्बर चुनावी रैलियों में भीड़ इकट्ठा कर सकते हैं। इसके साथ ही पिछड़ी जाति से आने के कारण राज बब्बर स्वर्ण जातियों के साथ पार्टी के लिए पिछड़ा वोट भी जुटा सकते हैं। राज बब्बर अपने राजनीतिक पारी की शुरूआत समाजवादी पार्टी से की थी और साल 2008 में समाजवादी से कांग्रेस में आ गए थे। इसके एक साल बाद राज बब्बर ने अपनी स्टार अपील की ताकत दिखाते हुए लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को हराया था।
असम और केरल में बुरी तरह पराजित होने के बाद सीनियर कांग्रेसी नेताओं ने कहा था कि पार्टी को सर्जरी की जरूरत है। उसके बाद से माना जा रहा था कि जल्द ही राहुल गांधी सोनिया गांधी की जगह अध्यक्ष के तौर पर पार्टी की कमान संभाल लेंगे और उसके बाद धीरे-धीरे पार्टी के सभी अहम पदों पर युवा नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। लेकिन उत्तर प्रदेश चुनाव में पार्टी ने अपने अनुभवी और पुराने नेताओं पर ही भरोसा जताया है।

