उत्तर प्रदेश के देवरिया में 5 सरकारी स्कूलों को आदर्श इस्लामिया विद्यालय के नाम से चलाए जाने और दोहरी व्यवस्था लागू किए जाने की खबरों से आला अधिकारी असहज हो गए हैं और जांच करने की बात कह रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देवरिया के विकास खण्ड रामपुर कारखाना में तीन, देसही देवरिया ब्लॉक में एक और सलेमपुर के नवलपुर में एक सरकारी स्कूल में दोहरी व्यवस्था चल रही है। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक देवरिया के बेसिक शिक्षा अधिकारी ने ऐसे स्कूलों पर सरकारी चाबुक चलाने की बात कही है। स्थानीय मीडिया के अनुसार सरकारी रजिस्टरों में ये परिषदीय प्राथमिक विद्यालय के तौर पर दर्ज हैं और इनके बैंक खाते भी परिषदीय विद्यालय के तौर हैं लेकिन आंतरिक व्यवस्था में इनका कामकाज मदरसे की तर्ज पर हो रहा है। दोहरी व्यवस्था वाले इन स्कूलों में शुक्रवार यानी जुमे के दिन छुट्टी होती है और रविवार के दिन पढ़ाई। इन सभी स्कूलों की दीवारों पर बड़े-बड़े अक्षरों में आदर्श इस्लामिया प्राथमिक विद्यालय लिखा हुआ है।

स्थानीय मीडिया के अनुसार रामपुर कारखाना ब्लॉक के करमहां के स्कूल में डेढ़ सौ से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं जिनमें 90 फीसदी बच्चे अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं। स्कूल के प्रधानाचार्य ने मीडिया को जानकारी दी कि उनके इस स्कूल में आने से पहले यह व्यवस्था लागू थी। इसी ब्लॉक के ईश्वरी पोखरभिंडा और शामी पट्टी गांव के प्राथमिक विद्यालयों को भी इस्लामिया स्कूल के नाम से चलाया जा रहा है।

स्कूल के रजिस्टर और बाकी सूचनाएं उर्दू में हैं। इसी तरह देसही देवरिया ब्लॉक के स्कूल को लेकर शिकायत सामने आई है। यहां का हरैया प्राथमिक विद्यालय शुक्रवार को बंद रहता है और रविवार को पढ़ाई होती है। स्कूल की इमारत पर लिखा गया है कि वह उर्दू मीडियम हैं। स्कूलों के प्रधानाचार्यों और उन से जुड़े शिक्षा मित्रों की दलील है कि मुस्लिम बहुल क्षेत्र में होने के कारण पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे भी उसी समुदाय से हैं और बाकी बच्चे अनुसूचित जाति से हैं, जोकि उर्दू पढ़ने की इच्छा रखते हैं। इनकी दलील ये भी है कि उन्हें जैसी व्यवस्था मिली, उसी को आगे बढ़ाया है और अब सरकार जैसा आदेश करेगी, वैसा करेंगे।