उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को झटका लग सकता है। बताया जाता है कि कांग्रेस नेतृत्व ने उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है जिसमें प्रियंका गांधी को उत्तर प्रदेश में तीन महीने चुनाव प्रचार और सोनिया गांधी के 20 दिन तक जनता के संपर्क में रहने की बात कही गई थी। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, प्रस्ताव खारिज होने के बाद अब पार्टी में कंफ्यूजन की स्थिति है कि अगला कदम क्या होगा। पार्टी के चुनावी प्रबंधक इस बात पर जूझ रहे हैकि राहुल गांधी की 26 दिवसीय ‘दिल्ली से देवरिया’ यात्रा से बने माहौल को आगे कैसे बढ़ाया जाए। बताया जाता है कि राहुल यात्रा के बाद प्रियंका गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष के धुआंधार प्रचार का कार्यक्रम खुद प्रशांत किशोर ने बनाया था। किशोर का प्लान कांग्रेस को थोड़ा राेमांचक लगा, वह अपने 2017 चुनाव में अपने सारे पत्ते नहीं खोलना चाहती। हाल ही में प्रियंका ने यूपी चुनाव पर एक समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया था, जो कि राज्य इकाई के साथ उनकी पहली बैठक थी। माना जा रहा है कि इस बार वह रायबरेली-अमेठी से सटे हुए जिलों में भी प्रचार करेंगे। लेकिन कांग्रेस उन्हें राज्य में कांग्रेस का ध्वजवाहक नहीं बनाना चाहती।
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एक प्रमुख पार्टी प्रबंधक ने टीओआई से बातचीत में कहा कि 10 दिनों में पार्टी में ‘बेहद भ्रम’ की स्थिति बन गई है। चर्चा इस बात की है कि राहुल और सोनिया के रोडशो से बनी फिजा बरकरार कैसे रखी जाए। इसके अलावा, पार्टी रणनीतिकारों और प्रशांत किशाेर के बीच दूरियां भी बढ़ती जा रही हैं। भ्रम इस स्तर तक फैला हुआ है कि लोगों तक पहुंच बनाने वाले कार्यक्रमों जैसे ब्राह्मण सभाओं की किस्मत पर भी अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। इस कार्यक्रम को अगड़ी जातियों में पहुंच बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, जिसके संकेत शीला दीक्षित को सीएम कैंडिडेट बनाकर कांग्रेस ने पहले ही दे दिए थे।
इस पूरे घटनाक्रम से ‘राहुल संदेश यात्रा’ का तय कार्यक्रम भी प्रभावित हुआ है। अब इसे एक सप्ताह के लिए बढ़ाकर 10 नवंबर से शुरू किए जाने की योजना है।

