सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को जेपी एसोसिएट्स को उसकी सहयोगी कंपनी जेपी इंफ्राटेक के खिलाफ चल रही दिवालियापन की कार्रवाई को देखते हुए न्यायालय के रजिस्ट्रार के पास 2,000 करोड़ रुपये जमा कराने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायाधीश ए. एम. खानविलकर और न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की खंडपीठ ने कहा है कि यह रकम 27 अक्टूबर तक जमा करानी होगी। खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई का दिन 13 नवंबर निर्धारित करते हुए कहा कि अगर इस रकम को जुटाने के लिए जेपी एसोसिएट्स अपनी किसी संपत्ति को बेचना चाहती है, तो इससे पहले उसे अदालत की अनुमति लेनी होगी। इसके साथ खंडपीठ ने कंपनी के प्रबंध निदेशक और सभी निदेशकों के देश छोड़ने पर रोक लगा दी है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि इनमें वो सभी लोग शामिल है जो नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की इलाहाबाद खंडपीठ द्वारा दिए गए 9 अगस्त को दिवालियापन की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश के समय कंपनी के निदेशक थे।10 अगस्त को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने जेपी बिल्डर्स को दिवालिया घोषित कर दिया था। कंपनी पर 8 हजार 365 करोड़ रुपये का कर्ज है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले पर रोक लगा दी गई थी।
जेपी इंफ्राटेक उन 12 अकाउंट्स में से एक है, जिन्हें दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया के लिए चुना गया था। गौरतलब है कि कुछ वक्त पहले आरबीआई ने बैंकों के एनपीए को कम करने की दिशा में कार्रवाई करते हुए 12 डिफॉल्टर्स की पहचान की थी। इन 12 खातेदारों पर बैंकों का करीब 5000 करोड़ रुपये से भी अधिक बकाया था। कुल एनपीए का 25 फीसदी इन 12 खातेदारों के नाम पर था। इन्हीं 12 खातेदारों में से एक है जेपी इंफ्राटेक भी है।

