सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश के विवादित मंत्री आजम खान की ओर से बिना शर्त मांगी गई माफी को स्वीकार करते हुए कहा है कि उन्होंने ईमानदारी से और गहरा खेद जताया है। आजम खान ने बुलंदशहर के सनसनीखेज सामूहिक बलात्कार मामले में अपनी कथित टिप्पणी के लिए माफी मांगी है। आजम खान की ओर से पूर्व में मांगी गई माफी पर अटॉर्नी जनरल ने आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद समाजवादी पार्टी के नेता की ओर से ताजा हलफनामा दायर किए जाने पर न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति अमिताव रॉय के पीठ ने कहा- प्रतिवादी संख्या दो (आजम खान) ने बिना शर्त माफी मांगी है और ईमानदार व गहरा खेद जताया है। खान के बिना शर्त माफी वाले नए हलफनामे को स्वीकार करने वाली पीठ ने यह स्पष्ट कर दिया कि इस मामले में आजम की ओर से दी जाने वाली किसी भी दलील को अब स्वीकार नहीं किया जाएगा। हालांकि पीठ ने कहा कि उसके द्वारा वाक एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संदर्भ में तय किए गए सवालों पर और बलात्कार व उत्पीड़न समेत घृणित अपराधों के मामलों में उच्च पदों पर बैठे लोगों के बयानों के कारण निष्पक्ष जांच पर पड़ने वाले असर पर बहस की जरूरत है। इसके साथ ही पीठ ने मामले को अगले साल की आठ फरवरी के लिए स्थगित कर दिया।
पीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा कि इस मामले में अदालत की मदद के लिए न्यायमित्र के रूप में नियुक्त किए गए प्रख्यात न्यायविद् एफएस नरीमन ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि खान की ओर से दायर हलफनामे को स्वीकार किया जाना चाहिए। खान का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पीठ को बताया कि चूंकि अदालत की ओर से बनाए गए सवाल संवैधानिक रूप से महत्त्वपूर्ण हैं इसलिए वे अदालत की मदद करना चाहेंगे। इस पर अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी और नरीमन ने सहमत होते हुए कहा कि यह बेहतर होगा कि सिब्बल अदालत की ओर पूर्व में तय किए गए सवालों के संदर्भ में अपनी राय रखें।
सात दिसंबर को शीर्ष अदालत ने कहा था कि बुलंदशहर सामूहिक बलात्कार मामले में उत्तर प्रदेश के मंत्री की कथित टिप्पणियों के लिए उनकी ओर से पूर्व में मांगी गई माफी बिना शर्त माफी प्रतीत नहीं होती। अदालत ने यह टिप्पणी खान के हलफनामे में प्रयुक्त यदि और तब जैसे कुछ शब्दों पर अटॉर्नी जनरल की ओर से आपत्ति उठाए जाने के बाद की थी। खान ने शीर्ष अदालत की ओर से 17 नवंबर को दिए गए निर्देश के अनुरूप माफी मांगते हुए यह हलफनामा दायर किया था।
खान का प्रतिनिधित्व करते हुए सिब्बल ने कहा था कि समाजवादी पार्टी के नेता एक ताजा हलफनामा दायर करेंगे। सुनवाई के अंत में सिब्बल ने कहा था कि उनका मुवक्किल माफी के बजाय गहरा खेद जताना चाहेगा। बुलंदशहर की यह निर्मम घटना 29 जुलाई की रात को हुई थी। राजमार्ग पर लूटपाट करने वाले एक गिरोह ने नोएडा के एक परिवार की कार को रोककर, उसमें सवार एक महिला और उसकी बेटी को बंदूक का भय दिखाकर बाहर खींच लिया था और फिर उनका यौन उत्पीड़न किया था।
शीर्ष अदालत ने 29 अगस्त को खान की इस विवादित टिप्पणी का संज्ञान लिया था, जिसमें उन्होंने सामूहिक बलात्कार को एक राजनीतिक साजिश बताया था। शीर्ष अदालत ने 17 नवंबर को खान को निर्देश दिया था कि वे इस मामले में अपनी कथित टिप्पणी के लिए ‘बिना शर्त माफी’ मांगें। इसके साथ ही अदालत ने ऐसे मामलों में सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों की ओर से दिए गए बयानों के मुद्दे से निपटने के लिए अटॉर्नी जनरल से मदद मांगी थी।
सिब्बल ने पूर्व में कहा था कि खान ने इस मामले में खुद को पीड़िताओं के खिलाफ खड़ा करते हुए कुछ नहीं कहा था। लेकिन यदि पीड़िता का पिता किसी भी तरह से अपमानित महसूस हुआ है तो खान माफी मांगने के लिए तैयार हैं। पहले उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से विभिन्न प्रावधानों के तहत 30 जुलाई को प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
सीबीआइ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश का पालन करते हुए 18 अगस्त को मामले को पुन: दर्ज किया था। जिस आदमी की पत्नी और बेटी के साथ जुलाई में बुलंदशहर के राजमार्ग पर बलात्कार किया गया था, उसने 13 अगस्त को शीर्ष अदालत का दरवाजा खटकाया था। उसने शीर्ष अदालत से इस मामले को दिल्ली स्थानांतरित करने और खान व कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने घटना की सीबीआइ जांच का आदेश दिया था और जांच की निगरानी करने का फैसला किया था।

