विश्व हिंदू परिषद की अगुआई में संतों ने श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के लिए केंद्र सरकार से संसद में कानून बनाने की मांग की। शुक्रवार को दिल्ली में श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास महाराज की अध्यक्षता में संतों की उच्चाधिकार समिति की बैठक में मौजूद सभी संतों ने एक स्वर में राजग सरकार से कहा कि वह जन्मभूमि पर संसद में कानून बना कर राममंदिर निर्माण के मार्ग की बाधाओं को दूर करे। बैठक में 35 प्रमुख संत शामिल हुए। स्वामी वासुदेवानंद और विश्वेशतीर्थ महाराज ने कहा कि प्रधानमंत्री आवश्यकता पड़ने पर लोकसभा व राज्यसभा का संयुक्त अधिवेशन बुलाकर कानून बनाएं और जन्मभूमि हिंदुओं के हवाले करें।
डा. रामविलास वेदांती, चिदानंद पुरी (केरल), स्वामी चिन्मयानंद व स्वामी अखिलेश्वरानन्द सहित देश भर से आए जगतगुरुओं, महामण्डलेश्वरों व अन्य धर्माचार्यों ने भी अपने विचार रखे और कानून बनाने की मांग का पुरजोर समर्थन किया। बैठक के बाद महंत नृत्य गोपालदास के नेतृत्व में संतों का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्र्रपति रामनाथ कोविंद से मिला और ज्ञापन दिया। ज्ञापन में राष्ट्रपति से आग्रह किया गया है कि वे सरकार को कानून बनाकर श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए कहें। वर्तमान परिस्थिति में यही समाधान उपयुक्त लगता है। बैठक में संतों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया जिसमें मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने की मांग के अतिरिक्त जन जागरण अभियान शुरू करने क ी भी घोषणा की। इस अभियान के तहत इस महीने राज्यों के
प्रतिनिधिमंडल अपने-अपने राज्य में राज्यपालों से मिल कर और ज्ञापन देकर अनुरोध करेंगे कि वे राम जन्मभूमि पर मंदिर के लिए कानून बनाने की उनकी मांग को केंद्र सरकार तक पहुंचाएं। नवंबर में सभी संसदीय क्षेत्रों में जनसभाएं होंगीं और विभिन्न प्रतिनिधिमंडल संतों के नेतृत्व में अपने सांसदों से मिलेंगे और उन्हें संसद में कानून बनाकर मंदिर निर्माण के लिए आग्रह करेंगे। संतों का एक प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री से भी मिलकर कानून बनाने का आग्रह करेगा। दिसंबर में देश में मठों-मंदिरों, आश्रमों, गुरुद्वारों व घरों में मंदिर निर्माण के लिए अनुष्ठान होंगे।
राष्ट्रपति से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में जगतगुरु रामानंदाचार्य, हंसदेवाचार्य महाराज, आचार्य महामंडलेश्वर, स्वामी विशोकानन्द भारती महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी परमानन्द गिरि महाराज, महामंडलेश्वर विश्वेश्वरानंद महाराज, अग्रदेवाचार्य राघवाचार्य महाराज, स्वामी चिन्मयानन्द सरस्वती, स्वामी रामेश्वरदास श्रीवैष्णव महाराज, स्वामी परमात्मानन्द महाराज, विश्व हिंदू परिषद् के आलोक कुमार, चंपतराय, जीवेश्वर मिश्र व डा. सुरेंद्र कुमार जैन शामिल थे।

