राजस्थान में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही टिकट की दावेदारी ने जोर पकड़ लिया है। कई ‘संतों’ ने भी चुनाव में ताल ठोकने की तैयारी कर रखी है। द इकॉनमिक टाइम्स में छपी रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए चार हिन्दू संत जोर-आजमाइश कर रहे हैं, जबकि एक अन्य की नजर कांग्रेस से टिकट हासिल करने पर है। भाजपा से टिकट की जुगत में लगे संतों में सबसे प्रमुख नाम योगी बालकनाथ का है, इन्हें मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ का करीबी बताया जाता है।
फिलहाल बालकनाथ रोहतक में नाथ संप्रदाय के मस्तनाथ मठ के महंत हैं। मूलरूप से राजस्थान के अलवर जिले से आने वाले बालकनाथ के लिए उनसे अनुयायी एक सोशल मीडिया अभियान चला रहे हैं, जिसमें उनको राजस्थान के मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताया जा रहा है। बालकनाथ ने अखबार से कहा, ”अगर भाजपा मुझे टिकट देती हैं तो मैं जरूर चुनाव लड़ूंगा।”
भाजपा से टिकट की चाह रखने वालों में नाथद्वारा से पूर्व बीजेपी विधायक कल्याण सिंह चौहान के गुरु, योगी संतोषनाथ का नाम भी चर्चा में है। संतोषनाथ की अपने क्षेत्र में हिन्दू मतदाताओं के बीच अच्छी पैठ बताई जाती है। टिकट के इच्छुकों में अलवर के तिजारा से आदित्यनाथ योगी का नाम भी है। मुस्लिम बहुत इलाके में वह हिन्दुओं के बीच प्रमुख चेहरा हैं। संघ से उनकी नजदीकी है और पिछले पांच साल से क्षेत्र में उनकी सक्रियता भाजपा से टिकट दिलाने में काम आ सकती है।
योगी ने अखबार से कहा, ”अगर भाजपा चाहती है तो मैं चुनाव लड़ने को तैयार हूं।” वसुंधरा की कैबिनेट में ओटाराम देवासी पहले से हैं, जो नवगठित गो-पालन विभाग देख रहे हैं। देवासी सिरोही से 2008 और 2013 में जीते थे, ऐसे में पार्टी उन्हें फिर से टिकट दे सकती है। कांग्रेस की तरफ से, कबीर पंथ के महंत निर्मल दास बाडमेर के सिवाना से चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि वह पिछले चुनाव में कांग्रेस टिकट पर हार गए थे।
राजस्थान में पिछले चुनाव में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी, वहां इस बार कांग्रेस और भाजपा में सीधी टक्कर दिख रही है। कुल 200 विधानसभा सीटों में से भाजपा ने 160 सीटें जीती थीं। पिछली बार कांग्रेस 21 सीटों पर सिमट गई थी, वहीं बसपा को 3, एनपीपी को 4 और एनयूजेडपी को 2 सीटें मिली थीं। जबकि 7 सीटों पर निर्दलीय जीते थे।
