रेलवे बोर्ड ने अपने विभिन्न जोन से रेलवे के कथित निजीकरण के खिलाफ श्रमिक संघ द्वारा अगले हफ्ते बुलाई गई तीन दिवसीय हड़ताल में भाग लेने वाले कर्मचारियों के बारे में जानकारी देने का निर्देश दिया है। बोर्ड ने शुक्रवार (12 जुलाई) को विभिन्न जोन को पत्र भेजकर उनसे ‘अनुशासन और रेलवे के सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम’ उठाने को कहा। यह तीन दिवसीय हड़ताल सोमवार (15 जुलाई) से बुधवार (17 जुलाई) तक की जाएगी।
15 से 17 जुलाई तक विरोध प्रदर्शन का आह्वानः रायबरेली की मॉडर्न कोच फैक्टरी के कर्मचारी रेलवे के कथित निजीकरण के खिलाफ पहले ही विरोध मार्च निकाल चुके हैं। शीर्ष रेलवे यूनियनों- इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन और नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन ने धमकी दी है कि यदि यह प्रस्ताव वापस नहीं लिया जाता है तो वह विरोध शुरू करेंगे। पत्र में कहा गया है कि ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन ने 15-17 जुलाई को विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है।
इन मांगों को लेकर हो रही हड़तालः श्रमिक संघ की तरफ से लिखे गए पत्र के अनुसार कर्मचारियों ने रेलवे निजीकरण के लिए 100 दिनों की कार्ययोजना को वापस लेने के अलावा विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर जाने की धमकी दी है। इन मांगों में किलोमीटर भत्ते की समीक्षा, गतिशील स्टाफ (ट्रेन में अपनी सेवाएं दे चुके) पेंशनधारियों के पेंशन में समतुल्यता, सुरक्षा समिति की सिफारिशों का क्रियान्वयन, रेलवे को सरकार में सेवा क्षेत्र में बनाए रखना आदि शामिल हैं।
ट्रेनों की सुचारू आवाजाही का मसला भी शामिलः पत्र में कहा गया कि उपरोक्त तथ्यों के आलोक में रेलवे प्रशासन अनुशासन एवं ट्रेनों की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कड़े कदम उठाएंगे। कर्मचारियों का विशेष ध्यान रेलवे अधिनियम, 1989 की धाराएं 173,174 और 175 की ओर आकर्षित किया जाए जो बिना अनुमति के ट्रेन को छोड़ने, ट्रेनों की आवाजाही में बाधा पहुंचाने, लोगों की सुरक्षा खतरे में डालने से संबंधित हैं।

