राजस्थान में गहलोत सरकार और सचिन पायलट के बीच राजनीतिक उठापटक का दौर जारी है। इसी बीच विधायकों के ऑडियो टेप लीक होने के बाद कांग्रेस ने राजस्थान के अपने दो विधायकों को निलंबित कर दिया है। ऑडियो टेप लीक के बाद कांग्रेस ने रणनीति बदली है और सचिन पायलट पर रुख नरम किया है। पार्टी पायलट के वापसी के दरवाजे खुले रखना चाहता है।
कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा “ऑडियो टेप की सच्चाई की जांच होने तक कांग्रेस विधायक भंवरलाल शर्मा और विश्वेंद्र सिंह को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया है और दोनों को कारण बताओ नोटिस दिया गया है।” इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रेस कॉन्फ्रेंस से ठीक पहले कॉन्फ्रेंस में मौजूद एक नेता को राहुल गांधी ने फोन किया था और सचिन पायलट पर किसी तरह का कोई आक्रामक बयान देने से इनकार किया था।
लीक हुए टेप को लेकर सचिन पायलट के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। वे अब भी कांग्रेस के सदस्य हैं, उन्हें पहले राजस्थान के पीसीसी प्रमुख और उपमुख्यमंत्री के पद से हटा दिया गया था। यह पूछे जाने पर कि सचिन पायलट को निलंबित क्यों नहीं किया गया है, सुरजेवाला ने कहा, “हमने उन लोगों को पार्टी से निलंबित किया है जिनके खिलाफ हमारे पास सबूत हैं।”
सुरजेवाला ने कहा कि राजस्थान में बीजेपी सत्ता लूटने की कोशिश कर रही है। लेकिन इस बार बीजेपी ने गलत प्रांत चुन लिया है। बीजेपी यहां विधायकों की निष्ठा को खरीदने का षड्यंत्र रच रही है। बीजेपी कोरोना महामारी के बीचो-बीच प्रजातंत्र का चीरहरण कर रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस में नेताओं को पार्टी आलाकमान ने सचिन पायलट पर नरम रुख अपनाने के लिए कहा है और युवा नेता के वापसी के दरवाजे खुले रखे हैं। सचिन पायलट को गांधी परिवार के साथ अच्छे संबंध साझा करने के लिए जाना जाता है।
बता दें कि इससे पहले गुरुवार को ही सचिन पायलट ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम से फोन पर बात की थी। फोन पर हुई इस बातचीत में चिदंबरम ने सचिन पायलट को वापस आने के लिए कहा है और उन्हें “सम्मानजनक वापसी” का आश्वासन दिया। दूसरी ओर गांधी परिवार भी लगातार सचिन पायलट को मनाने की कोशिशें कर रहा है।
