हिंदू रीति-रिवाजों में पितृ पक्ष का अहम स्थान है। आमतौर पर लोग इन दिनों अपने पूर्वजों का श्राद्ध कर्म करते हैं। लेकिन बिहार के गया में एक ऐतिहासिक मामला सामने आया है। यहां एक सामाजिक कार्यकर्ता ने आतंकियों और उग्रवादियों के लिए श्राद्ध कर्म और पिंड दान किया। पितृ पक्ष के अंत में इस शख्स ने उनका श्राद्ध-पिंड दान किया जो जम्मू-कश्मीर समेत देश के अन्य हिस्सों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में ढेर हो गए थे। बिमलेंदु चैतन्य नाम के इस शख्स ने अपने इस कदम के पीछे का नजरिया भी स्पष्ट किया।
आतंकियों को बताया आधुनिक दुनिया के राक्षसः गया के पेशे से पत्रकार बिमलेंदु चैतन्य शहर में सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर भी पहचाने जाते हैं। उन्होंने शनिवार (28 सितंबर) को विष्णुपद में गयावाल पंडा और मंदिर के अन्य पुजारियों की मौजूदगी में उन्होंने यह प्रक्रिया पूरी की, इन आतंकियों और उग्रवादियों को वे आधुनिक दुनिया के राक्षस बताते हैं।
राम-लक्ष्मण-सीता ने भी किया था राक्षसों का श्राद्धः अध्यात्म, शास्त्र और धर्म के अपने ज्ञान का जिक्र करते हुए चैतन्य कहते हैं, ‘भगवान राम, उनकी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण ने भी रावण पर जीत के बाद गया में अपने दुश्मन राक्षसों का श्राद्ध किया था। युद्ध में जो भी राक्षस उनके तीर से मारे गए थे उनका भगवान राम ने पिंड दान भी किया था।’
‘हर आत्मा में ईश्वर का अंश मौजूद’: उन्होंने कहा, ‘हम हर चीज में भगवान को देखते हैं और आत्मा चाहे बुरे व्यक्ति की हो या अच्छे व्यक्ति की, उसमें सर्वशक्तिमान भगवान का समान अंश मौजूद होता है। आतंकी भी मौत के बाद उसी भगवान से मिलते हैं और अपने कर्मों के हिसाब से फल पाते हैं। शरीर और आत्मा अलग-अलग होने के बाद सभी एक ही दुनिया में जाते हैं।’
