वर्ष 2026 नोएडा के वस्त्र निर्यातकों के लिए राहत भरा साबित हो सकता है। अमेरिकी शुल्क बढ़ने के बाद जिस तरह यहां के कारोबारियों के सामने 25 से 30 हजार करोड़ रुपये के निर्यात बाजार का संकट खड़ा हो गया था, उसकी भरपाई में रूस का बाजार अहम भूमिका निभा सकता है। हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे के बाद से वस्त्र उद्योग को लेकर सकारात्मक संकेत मिलने लगे हैं।
हालांकि अमेरिकी बाजार की तुलना में रूस भारतीय वस्त्र निर्यातकों के लिए उतना बड़ा नहीं है, लेकिन अमेरिका को होने वाला निर्यात लगभग ठप पड़ने के बाद यदि कुछ हजार करोड़ रुपये का निर्यात भी रूस को बढ़ता है, तो इससे नोएडा की कई इकाइयों में संभावित छंटनी और बंदी के खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है।
नोएडा अपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर के महासचिव राजीव बंसल ने जनसत्ता से बातचीत में बताया कि जिले में आठ हजार से अधिक रेडीमेड कपड़ा निर्माण इकाइयां हैं, जिनसे प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से करीब दस लाख लोग जुड़े हुए हैं। इन इकाइयों से सालाना 60 हजार करोड़ रुपये से अधिक का वस्त्र निर्यात होता है, जिसमें करीब 40 प्रतिशत यानी लगभग 25 हजार करोड़ रुपये का निर्यात अकेले अमेरिका को किया जाता था।
उन्होंने बताया कि ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर उच्च शुल्क लगाए जाने से वस्त्र समेत भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे हो गए, जिसका सबसे गहरा असर नोएडा के वस्त्र उद्योग पर पड़ा है। दूसरी ओर, रूस का वस्त्र आयात बाजार करीब सात अरब डॉलर का है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी फिलहाल महज डेढ़ प्रतिशत के आसपास है। हालिया द्विपक्षीय बातचीत के बाद निर्यात प्रोत्साहन परिषदों को उम्मीद है कि इस साल रूस को करीब दो हजार करोड़ रुपये तक का वस्त्र निर्यात संभव हो सकता है।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के मुताबिक, भारत और रूस के बीच व्यापार घाटा करीब 59 अरब डॉलर का है। भारत रूस को साढ़े चार अरब डॉलर का निर्यात करता है, जबकि रूस से भारत करीब 64 अरब डॉलर का आयात करता है।
चूंकि भारत और रूस के बीच व्यापार रुपये में होता है, ऐसे में रूस के पास बड़ी मात्रा में भारतीय मुद्रा उपलब्ध है। इन रुपयों के उपयोग के लिए रूस का भारत से अधिक आयात करना आवश्यक हो गया है। इसी वजह से वस्त्र उद्योग के साथ-साथ दवा, कृषि और इंजीनियरिंग उत्पादों के क्षेत्र में भी व्यापार बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच व्यापार शुल्क और कर संरचना को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है।
