राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील 51 किलोमीटर लंबे मनाली-रोहतांग राजमार्ग पर परिवहन के साधन का फैसला करने में देरी को लेकर गुरुवार को हिमाचल प्रदेश सरकार की खिंचाई की। हरित अधिकरण ने सीएनजी बसों का परीक्षण करने के बाद, राज्य सरकार के इस रुख पर भी आपत्ति जताई कि राज्य में प्रदूषण पर काबू पाने के लिए वह पर्यावरण अनुकूल इलेक्ट्रिक बसें खरीदने पर विचार कर रही है।

अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि आपने यह तय करने में एक साल से ज्यादा समय ले लिया है कि रोहतांग दर्रा कौन सा वाहन जाना चाहिए। आप हमारे सामने बताइए कि इस क्षेत्र में आप परिवहन के कौन से साधन को तरजीह देंगे- सीएनजी या इलेक्ट्रिक। इस मामले में स्पष्ट निर्देश के साथ आइए। हम भारी उद्योग मंत्रालय से दो इलेक्ट्रिक बसें राज्य के लिए खरीदने को कहेंगे और आप उनका परीक्षण करिए।

लेकिन, कृपया कुछ कीजिए। इसके पहले राज्य सरकार ने पीठ से कहा कि उसने पारिस्थितिकीय रूप से संवेदशनील रोहतांग दर्रा इलाके के लिए परिवहन के साधन के बारे में अभी फैसला नहीं किया है।

राज्य सरकार ने पिछले साल अगस्त में पीठ से कहा था कि उसकी योजना वशिष्ठ से रोहतांग के बीच नियमित परिचालन के लिए सीएनजी बसें शुरू करने की है व इसका प्रायोगिक परीक्षण सफल रहा है। अधिकरण ने पर्यावरण क्षय व ग्लेशियरों के पिघलने पर काबू पाने के लिए रोहतांग दर्रा इलाके में पर्यटन और वाणिज्यिक गतिविधियों पर रोक लगा दी है। ये ग्लेशियर 1986 से ही सालाना 20 मीटर की तेज दर से घट रहे हैं।