अरुणाचल प्रदेश के संवेदनशील असाफीला इलाके में भारतीय सेना के गश्त को लेकर चीन की आपत्ति से उपजा विवाद थमा भी नहीं कि एक दिन बाद ही लद्दाख में चीनी सैनिकों द्वारा कई बार घुसपैठ का खुलासा हुआ है। लद्दाख में संवेदनशील पैंगोंग झील इलाके में चीनी सैनिकों के घुसपैठ को लेकर भारत तिब्बत सीमा पुलिस ने गृह मंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंपी है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल 28 फरवरी से 12 मार्च के बीच चीनी सैनिक तीन बार इस इलाके में छह किलोमीटर भीतर तक घुस आए। आइटीबीपी ने चीनी सैन्य अधिकारियों के साथ नियमित बैठकों में तीनों घटनाओं को लेकर आधिकारिक विरोध दर्ज कराया है।
आइटीबीपी की रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि इस साल मार्च महीने में चीन ने लद्दाख सेक्टर में सबसे ज्यादा घुसपैठ की कोशिशें की। इस रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने पिछले एक महीने में 20 बार भारत-चीन सीमा पर घुसपैठ की कोशिश की। तीन बार घुसपैठ में सफल रहे। चीनी सैनिकों ने उत्तरी पैंगोंग झील के पास 28 फरवरी, सात मार्च और 12 मार्च को घुसपैठ की। इन घुसपैठों के दौरान चीनी सैनिक छह किलोमीटर तक अंदर घुस आए थे। घुसपैठ की यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब चीनी सेना ने अरुणाचल प्रदेश में सीमा से लगे सामरिक रूप से लगे संवेदनशील असाफीला इलाके में भारतीय सेना के गश्त पर विरोध जताया। भारत ने इस इलाके को अपनी जमीन बताते हुए चीन की आपत्ति को सिरे से खारिज कर दिया है।
चीन ने यह मुद्दा बॉर्डर पर्सनल मीटिंग (बीपीएम) में 15 मार्च को उठाया था। भारत की तरफ से यह साफ कर दिया गया कि अरुणाचल प्रदेश का ऊपरी सुबानसिरी क्षेत्र भारत का हिस्सा है और वहां पर लगातार गश्त की जाती रही है। चीन ने भारत के गश्त को अतिक्रमण बताया, जिस पर भारत ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। अरुणाचल प्रदेश के किबिथू इलाके से सटी सीमा पर चीन के टाटू कैंप और न्यू टाटू कैंप हैं। इन जगहों पर चीनी सेना ने कंक्रीट की मजबूत इमारत, फायरिंग रेंज और हेलीपैड, पक्की सड़क बना रखी है। जवाब में भारत ने सरहदी इलाकों में बुनियादी ढांचा मजबूत करना शुरू किया है। साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए की लागत से चीन से लगी सीमा पर सड़क निर्माण तेजी चल रहा है। 73 परियोजनाओं में से 18 पूरी हो गई हैं। बाकी को 2020 तक पूरा करने की योजना है।

