विदेशों में पढ़ाई करने के इच्छुक विद्यार्थियों को अब अपने दस्तावेजों के सत्यापन के लिए अलग-अलग कॉलेजों और विश्वविद्यालयों का चक्कर नहीं काटना पड़ेगा क्योंकि सीबीएसई के परिणाम मंजूषा को आॅनलाइन पहल ‘ई-सनद’ से जोड़ दिया गया है। आने वाले समय में विश्वविद्यालयों के रेकार्ड को भी इससे जोड़ने के लिए पहल की जा रही है।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के अध्यक्ष आरके चतुर्वेदी ने बताया कि देश के सभी छात्रों का शैक्षणिक रेकॉर्ड तैयार कर उसे आॅनलाइन वेबसाइट के जरिए सभी स्कूलों से जोड़ दिया है। इस परियोजना को ‘परिणाम मंजूषा’ नाम दिया गया है और अब इन्हें ‘ई-सनद’ से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि परिणाम मंजूषा डिजीटल मार्कशीट से आगे का चरण है। जिसमें अब कोई छात्र स्कूल बदलता है तो दूसरा स्कूल उसके पूर्व का रेकार्ड देख सकता है।

उन्होंने कहा कि सीबीएसई ने इस परियोजना के तहत तीन सुविधाएं दी हैं, जिसमें सीबीएसई और उसके क्षेत्रीय कार्यालय किसी भी छात्र का बायोडाटा आॅनलाइन देख सकते हैं। उसके बादे ये सुविधा स्कूलों को भी दी गई है। वहीं कोई भी स्कूल किसी भी छात्र का आॅनलाइन पुष्टि भी इस सुविधा के तहत कर सकता है। वहीं तीसरा चरण डिजीटल लॉकर पहले से शुरू कर दिया गया है। अभी तक 11 लाख बच्चों ने इस साफ्टवेयर का लाभ प्राप्त किया है। अभी इस प्रणाली से 2014-15, 2015-16 के रेकार्ड उपलब्ध कराए गए हैं और अब 2016-17 के रेकार्ड को इससे जोड़ा जाएगा।

सीबीएसई की ओर से छात्रों के लिए शुरू की गई डिजिटल लॉकर प्रणाली के पंजीकरण में काफी रुचि देखी गई है। सीबीएसई ही छात्रों को डिजीटल लॉकर का परिचालन करने के लिए लॉगिन आइडी और पासवर्ड सृजित करती है। यह प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। डिजिटल इंडिया अभियान के अंतर्गत शुरू किए गए परिणाम मंजूषा पोर्टल के तहत डिजिटल लॉकर की सुविधा मिलने से छात्र अपने अंकपत्र को डिजिटल रूप से सुरक्षित कर सकेंगे।

इसके साथ ही छात्र अपने दस्तावेजों को किसी भी संस्थान को मेल कर सकेंगे। सीबीएसई द्वारा तैयार डिजिटल मार्कशीट सुरक्षित रहेगी। इस सुविधा से कॉपी होने और मूल दस्तावेजों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने की परेशानी से भी राहत मिलेगी। संस्थान भी इस पोर्टल पर पंजीकरण करा सकते हैं। इसके बाद स्कूल में दाखिला लेने के लिए लगाए गए दस्तावेजों की पुष्टि भी संस्थान कर पाएंगे। सीबीएसई और उसके क्षेत्रीय केंद्रों को भी यह सुविधा दी गई है। वह छात्र से संबंधित शैक्षणिक रेकॉर्ड अपलोड कर सकते हैं।
इसके जरिए छात्रों को डिजिटल मार्कशीट के साथ-साथ पास प्रमाणपत्र और माइग्रेशन सर्टिफिकेट भी डिजिटल रूप से उपलब्ध हो रहा है। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को कहा था कि हम प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल कर रहे हैं जो विदेशों में पढ़ाई करने जाने वाले छात्रों की सुविधा की दृष्टि से अहम है। उन्होंने कहा था कि इस पहल में सीडीएसएल और एनएसडीएल का सहयोग लिया जाएगा जिनका डीमैट शेयर के संबंध में अच्छा रेकार्ड है।