प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पहले की सरकार के समय घोटाले होते थे और विपक्ष इसका विरोध करता था, लेकिन इस सरकार ने कालाधन, भ्रष्टाचार को समाप्त करने का मिशन आगे बढ़ाया है तो विपक्ष इसका विरोध कर रहा है। मोदी ने वामदलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अपनी विचारधारा को तिलांजलि दे रहे हैं। उन्होंने नोटबंदी के समर्थन में रहे दिग्गज वामपंथी नेताओं दिवंगत हरकिशन सिंह सुरजीत और ज्योति बसु की टिप्पणियों का जिक्र करते हुए वामदलों पर कांग्रेस का पक्ष लेने पर निशाना साधा। नोटबंदी के मुद्दे पर संसद के शीतकालीन सत्र के लगभग हंगामे की भेंट चढ़ने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी दलों की आलोचना को बेइमानों और भ्रष्ट लोगों के समर्थन के रूप में पेश किया।
शुक्रवार को भाजपा संसदीय दल की बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहले की सरकार (यूपीए) के समय घोटाले होते थे और विपक्ष इसका विरोध करता था। लेकिन अभी की सरकार (राजग) ने कालाधन को समाप्त करने का मिशन आगे बढ़ाया है और विपक्ष इसका विरोध कर रहा है। नोटबंदी का विरोध करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा कि उन्होंने भ्रष्टाचार और कालाधन के खिलाफ कड़े कदम उठाने की वकालत की थी। लेकिन 10 वर्षों के बाकी पेज 8 पर उङ्मल्ल३्र४ी ३ङ्म स्रँी 8
शासन के दौरान कुछ नहीं किया। मोदी ने 1991 में दिए गए मनमोहन सिंह के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने (सिंह ने) एक बार कर चोरी करने वालों के बारे में खतरे की भाषा का उपयोग किया था। लेकिन आज उनकी आवाज पूरी तरह से बदल गई है। मोदी ने सवाल किया, ‘ क्यों ? क्योंकि उन्हें अपनी पार्टी की चिंता है, देश की नहीं। ’
प्रधानमंत्री ने कालाधन के खिलाफ कार्रवाई के अभाव को लेकर तत्कालीन यूपीए सरकार के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हमारे देश में संसद में व्यवधान के कारण कार्यवाही नहीं चल पा रही है। इस बार यह ज्यादा लंबा है। प्रधानमंत्री ने सांसदों से कहा कि इससे पहले, विपक्षी दल 2 जी, कोलगेट जैसे घोटालों को लेकर सरकार के खिलाफ लामबंद होते थे। लेकिन अब विपक्ष कालेधन और भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए सरकार के प्रयास के खिलाफ एकजुट है।
मोदी ने कहा कि पहली बार सत्तापक्ष ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम उठाया है और विपक्षी दल बेइमानों के समर्थन में एक साथ आ गए हैं। राजनीति का स्तर इतना गिर गया है कि विपक्षी दल खुले तौर पर बेइमानों के पक्ष में बोल रहे हैं। मोदी ने पार्टी नेताओं से कहा कि उन्हें देश से भ्रष्टाचार और कालाधन को समाप्त करने के लिए लड़ाई लड़नी है। उन्होंने इस संदर्भ में दिग्गज वामपंथी नेता दिवंगत हरकिशन सिंह सुरजीत का जिक्र करते हुए अपनी सरकार के कदम का समर्थन किया।
संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने लोगों से अपनी जीवन-शैली के रूप में डिजिटल अर्थव्यवस्था का उपयोग करने का आग्रह किया जो भ्रष्टाचार और कालाधन को समाप्त करने में कारगर होगा। मोदी ने कहा कि इससे लेनदेन प्रभावी और पारदर्शी बनेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिए पार्टी का हित देशहित से ऊपर है, लेकिन भाजपा के लिए देश हित सर्वोच्च है। भाजपा संसदीय दल की बैठक में कालाधन के मामलों को देखने के लिए विशेष जांच दल (एसआइटी) गठित करने में पूर्ववर्ती सरकार की विफलता का विषय भी उठा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज बांग्लादेश मुक्ति संग्राम से जुड़ा विजय दिवस है और उस समय विपक्ष ने इसका कोई सबूत नहीं मांगा था, लेकिन आज सबूत मांगे (सेना के अभियान के बारे में) जा रहे हैं। अनंत कुमार के अनुसार, मोदी ने कहा कि 70 के दशक के प्रारंभ में वांगचू समिति ने नोटबंदी की सिफारिश की थी और उस समय इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं। उन्होंने याद दिलाया कि वरिष्ठ वामपंथी नेता ज्योति बसु ने इसे तेजी से लागू करने की मांग की थी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वांगचू समिति ने कहा था कि इससे अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। अब इसके 45 वर्ष गुजरने के बाद नोटबंदी हुई है और कांग्रेस इसका विरोध कर रही है। वामदलों ने भी कांग्रेस से हाथ मिला लिया है। कांग्रेस को भ्रष्टाचार के पक्षधर के रूप में पेश करते हुए मोदी ने कहा कि उसने 1988 में बेनामी सम्पत्ति संबंधी कानून बनाया। लेकिन इसके नियमों और नियमन को अधिसूचित नहीं किया ताकि इसे प्रभावी बनाया जा सकता।

