देश में निर्मित अत्याधुनिक तोपें ‘धनुष’ व ‘सारंग’ को अगले महीने फरवरी में सेना में शामिल किया जाएगा। दोनों ही तोपें सेना के हर परीक्षण में पूरी तरह सफल घोषित की गई हैं। धनुष को बोफर्स तोप की जगह और सारंग को रूसी एम-46 की जगह तैनात किया जाएगा। पहले चरण में 414 धनुष तोपें सेना में शामिल की जाएंगी। सारंग तोपों की संख्या तीन सौ होगी। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, धनुष तोप को दुनिया की सबसे मारक पांच तोपों में एक माना जाता है। प्रवक्ता के मुताबिक, बोफर्स की तुलना में इसकी मारक क्षमता 18 किलोमीटर अधिक है। धनुष तोप को 31 साल पुरानी बोफर्स तोप की जगह तैनात किया जा रहा है। सेना के लिए परीक्षण के तहत इससे 2000 राउंड गोले दागे गए। सेना ने सियाचीन और राजस्थान के पोखरन में करीब 1500 राउंड गोले दागे, तब इसे आयुध भंडार में शामिल किए जाने को हरी झंडी दिखाई।
सारंग तोप रूसी तोप एम-46 की जगह लेगी। रूसी तोप 1968 से सेना के पास है, जो 130 एमएम कैलिबर की हैं। सारंग तोपों को रक्षा मंत्रालय की ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड और फील्ड गन फैक्टरी, कानपुर ने मिलकर तैयार किया है। यह इजरायली तोप सॉल्टम का आधुनिक संस्करण है। यह 155 एमएम कैलिबर की तोप है। मार्च 2018 के बाद से शुरू किए गए इसके परीक्षणों में इस तोप ने कई अन्य कंपनियों की तोपों को पछाड़ कर सेना से ऑर्डर हासिल किया था। वर्ष 2022 तक तीन सौ तोपों का निर्माण कर सेना को दिया जाना है।
धनुष देश की पहली ऐसी तोप होगी, जिसके 90 फीसद कल-पुर्जे भारत में बने हैं। इसके बैरल का वजन 2692 किलो और रेंज 46 किलोमीटर तक है। यह तोप हर मिनट में दो गोले दागती है और दो घंटे तक लगातार गोलाबारी करने में सक्षम है। इसके एक गोले का वजन 46.5 किलो है। यह तोप शून्य से तीन डिग्री कम से लेकर 55 डिग्री सेल्सियस तक काम करने में सक्षम है। इस तोप का बैरल रूसी और यूरोपीय तकनीक से तैयार किया गया है, जो किसी भी सूरत में नहीं फटेंगे। दूसरी ओर, सारंग तोपों को 70 डिग्री तक घुमाया जा सकता है। यह तोप पहाड़ी इलाकों में बेहतर है।

