कश्मीर के मुद्दे पर भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को जमकर लताड़ पिलाई है। पाकिस्तानी राजदूत की ओर से संयुक्त राष्ट्र महासभा की चर्चा में कश्मीर का हवाला दिए जाने के बाद मंगलवार को भारत ने पाकिस्तान को स्पष्ट कहा कि चाहे वह कितनी भी खोखली दलीलें दे दे, यह सचाई नहीं बदल सकती है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। सोमवार को संयुक्त राष्ट्र में महासभा में ‘जनसंहार, युद्ध अपराध, जातीय संहार और मानवता के खिलाफ अपराध को रोकने व उससे संरक्षण की जिम्मेदारी’ विषय पर हो रही चर्चा के दौरान पाकिस्तान की राजदूत मलीहा लोदी ने कहा था कि कश्मीर हत्या और जनसंहार जैसे गंभीर अपराधों से पीड़ित जगहों में शामिल है। उन्होंने पुराना राग अलापा कि कश्मीर में भारतीय सेना नागरिकों को परेशान कर रही है।
उत्तर देने के अधिकार के तहत भारत ने संयुक्त राष्ट्र की 193 सदस्यीय संस्था में पाकिस्तान द्वारा कश्मीर का इस तरह हवाला दिए जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई मिशन में प्रथम सचिव संदीप कुमार बाय्यपू ने कहा, ‘ऐसे वक्त में जब सभी के लिए महत्व रखने वाले मुद्दे पर पिछले एक दशक में पहली बार गंभीर चर्चा हो रही है हमने देखा कि एक प्रतिनिधि ने फिर से भारतीय राज्य जम्मू-कश्मीर का गलत हवाला देने के लिए इस मंच का दुरुपयोग किया है।’ संदीप ने कहा कि अतीत में भी संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद्दा उठाने के पाकिस्तान के कुटिल प्रयास विफल रहे हैं और उसे कोई समर्थन नहीं मिला है। उन्होंने कहा, ‘मैं इस बात को रेकॉर्ड में शामिल कराना चाहूंगा कि जम्मू-कश्मीर राज्य भारत का अभिन्न और अखंड अंग है। पाकिस्तान की कोई खोखली दलील इस सच्चाई को बदल नहीं सकती है।’
इसी चर्चा के दौरान भारत ने सुरक्षा परिषद पर भी सवाल उठाए। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से सवाल किया है कि जब यहां बड़े पैमाने पर दूसरे देशों का प्रतिनिधित्व ही नहीं है तो वह कैसे बड़ी आबादी को बचाने, जनसंहार रोकने और मानवता के खिलाफ अपराध रोकने जैसे नेक कार्यों को पूरा कर सकती है। भारत का कहना है कि ऐसी चुनौतियों से निपटने में सुरक्षा परिषद का अब तक का रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है और कई तरह के सवाल उठे हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि अगर इन कार्यों को निष्पक्ष तरीके से पूरा किया जाना है तो कई गंभीर सवालों से निपटना होगा।
उन्होंने कहा, ‘हम जिन अपराधों की चर्चा कर रहे हैं उसकी सामान्य तौर पर स्वीकृत कानूनी परिभाषाओं को कैसे सुनिश्चित करेंगे? अंतरराष्ट्रीय समुदाय कार्रवाई के लिए किस चीज का इंतजार कर रही है? कौन सी इकाई इतनी मजबूत है कि वह इस तरह के फैसले लेने में सक्षम हो? क्या होगा जब इस तरह की इकाई में अंतरराष्ट्रीय समुदाय का व्यापक प्रतिनिधित्व ही नहीं हो, जब सामान्य चुनौतियों से निपटने के मामले में इस तरह के निकाय के रिकार्ड पर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हों।’
सुरक्षा परिषद पर सवाल
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से सवाल किया है कि जब यहां बड़े पैमाने पर दूसरे देशों का प्रतिनिधित्व ही नहीं है तो वह कैसे बड़ी आबादी को बचाने, जनसंहार रोकने और मानवता के खिलाफ अपराध रोकने जैसे नेक कार्यों को पूरा कर सकती है।

