राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के एक साथ देश से बाहर यात्रा पर होने के कारण विदेश मंत्रालय में राजनयिक कैलेंडर की अनदेखी का मसला उठने लगा है। विदेश मंत्रालय ऐसे दौरों के कार्यक्रम तय करता है। प्रोटोकॉल और परंपरा के अनुसार, एक वक्त में दोनों महामहिमों में से कोई एक ही विदेश दौरे पर रह सकता है। लेकिन सात से नौ सितंबर तक की अवधि में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू देश से बाहर रहे। राष्ट्रपति कोविंद अपनी तीन देशों की सात दिवसीय यात्रा पूरी कर रविवार रात को स्वदेश लौट आए। जबकि, उप राष्ट्रपति नायडू शिकागो की यात्रा पर हैं, जहां वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वारा आयोजित विश्व हिंदू कांग्रेस के आयोजन में हिस्सा ले रहे हैं।

राष्ट्रपति तीन देशों की राजकीय यात्रा पर थे। लेकिन उपराष्ट्रपति की शिकागो यात्रा राजकीय नहीं थी। विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, उनके लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस की ओर से कोई औपचारिक निमंत्रण नहीं भेजा गया था। अधिकारियों ने इस सवाल पर भी कुछ नहीं कहा कि क्या शिकागो यात्रा के लिए संघ या भाजपा ने निमंत्रित किया था? दरअसल, परंपरा और प्रोटोकॉल के मुताबिक, विदेश मंत्रालय यह ध्यान रखता है कि दोनों महामहिम एक साथ विदेश दौरे पर न रहें। किसी आकस्मिक परिस्थिति की संभावना के मद्देनजर ऐसा प्रोटोकॉल तैयार किया गया है।

राष्ट्रपति कोविंद मध्य एशिया के तीन देशों- साइप्रस, बुल्गारिया और चेक रिपब्लिक के दौरे पर थे। वह रविवार की रात को लौट आए। उपराष्ट्रपति सात सितंबर को शिकागो गए। वहां उन्होंने रविवार को विश्व हिंदू कांग्रेस (डब्ल्यूएचसी) में हिस्सा लिया। इसका आयोजन स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण के 125 साल पूरे होने के मौके पर किया गया। इसके अलावा उपराष्ट्रपति शिकागो में आंध्र प्रदेश मूल के लोगों के संगठनों के कई कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं।