राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के इलाके में दिवाली के बाद से धुंध और धुंए के कारण प्रदूषण बढ़ गया है। प्रदूषण इस कदर बढ़ गया है कि लोगों को सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, घुटन महसूस होने जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोग अपने घरों से मास्क पहनकर निकलने पर मजबूर है। धुएं और धुंध की यह चादर दिल्ली के आसपास के इलाकों में फैल चुका है। केंद्र सरकार के संस्थान सफर ने प्रदूषण को लेकर लोगों को सावधान रहने की नसीहत दी है। सफर के मुताबिक दिल्ली और एनसीआर में सोमवार को प्रदूषण पुणे और मुंबई के मुकाबले अधिकतम स्तर पर पांच से छह गुना ज्यादा रहने का अनुमान है। यह संस्थान इन तीनों महानगरों में रोजाना की आबोहवा पर निगाह रखता है। इतना ही नहीं, रविवार को दिल्ली की हवा चीन की राजधानी बीजिंग और बड़े शहर शंघाई के मुकाबले चार से पांच गुना ज्यादा खराब रही। लेकिन कभी प्रदूषण के मामले में चीन की हालत भारत से भी ज्यादा बदतर थी। यहां पर लोगों को सांस लेने की भी कीमत चुकानी पड़ी। यहां के लोगों को हवा खरीदनी पड़ी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि दिल्ली में पहले की तुलना में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है और वह भी बीजिंग की राह पर है। अगर ऐसा हुआ तो क्या हमें भी हवा खरीद के सांस लेने पड़ेगी।
यहां एक सांस की कीमत दस रुपए
एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन के बीजिंग शहर में सांस लेने के लिए साफ हवा बोतल में बिकी थी। विटैलिटी एयर नाम की कनाडा की एक कंपनी ने बोतल में भर रहे ताजी हवा सेल कर रही थी। 160 ग्राम के एक कनस्टर (बोतल) की कीमत 1500 रुपए है। इस बोतल में भरी साफ हवा के जरिए आप प्रति एक सेकेंड के हिसाब से 150 सांसें ले सकते हैं। इस लिहाज से एक सांस की कीमत वहां के लोगों के लिए 10 रुपए ठहरती है। इस कंपनी की स्थापना 2014 में मुसेस लाम और ट्रॉय पैक्यूट्टे ने की थी। वहीं, दिल्ली और आसपास के इलाके में प्रदूषण के बीच होटल और रेस्टोरेंट ये प्रचारित कर रहे हैं उन्हें यहां स्वच्छ हवा उपलब्ध है। उनका कहना है कि उन्होंने अपने यहां एयर प्यूरिफायर लगा रखा है जिससे उनके पास स्वच्छ हवा है। इस तरह की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।
वीडियो: धुंध की मोटी चादर से घिरी दिखी राजधानी दिल्ली
17 सालों में सबसे भयानक दौर से गुजर रही दिल्ली
गौरतलब है कि दिल्ली पिछले 17 सालों में प्रदूषण के सर्वाधिक भयानक दौर से गुजर रही है। दिवाली के बाद लगातार सात दिन से राजधानी में अबतक इतना धुआं, धूल व कुहासा छाया रहता है कि दिन में भी गाड़ियों की हेडलाइट जलानी पड़ रही हैं। दिल्ली के लगभग 1,800 प्राइमरी स्कूलों को बंद करने का आदेश पहले ही दिया जा चुका है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि पड़ोसी राज्यों में फसलें जलाए जाने के कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। फसलों को जलाए जाने से उठा धुआं एक जगह ठहर गया है।
