राष्ट्रीय राजधानी में वायु गुणवत्ता शुक्रवार (26 अक्टूबर, 2018) को बेहद खराब होकर ‘गंभीर’ स्तर के पास पहुंच गई। विशेषज्ञों के अनुसार अगले महीने उत्तर-पश्चिम की ओर से हवाओं के आने की आशंका है, जिससे दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता के और खराब होने की आशंका है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने शुक्रवार शाम वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 361 पर दर्ज किया जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है, और ‘गंभीर’ से अधिक दूर नहीं है। इसके अलावा आशंका है दिल्ली हवा का स्तर दिवाली से पहले और दिवाली के बाद गंभीर स्तर को पार कर जाए। इसलिए सीपीसीबी ने दिल्लीवासियों को सलाह दी है कि नवंबर के शुरुआती दस दिनों तक घरों से कम से कम निकलें और मॉर्निंग वॉक पर भी ना जाएं। इसके अलावा पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण (EPCA) ने दिल्ली-एनसीआर में दस दिन तक निर्माण का काम नहीं करने की भी सिफारिश की है और चार से 10 नवंबर तक कोल और बायोमास फैक्ट्रियां नहीं खुलने को कहा है। इस दौरान लोगों को यह भी सलाह दी गई है कि वो अपने घरों से कम बाहर निकले और सफर भी कम ही करें। लोगों से कहा गया है कि इन दिनों वो डीजल और पेट्रोल के वाहन ना चलाएं। चूंकि दिवाली के समय हवा की गुणवत्ता तेजी से नीचे जाने की काफी उम्मीद है।
गौरतलब है कि 0 से 50 के बीच एक्यूआई ‘‘अच्छा’’ माना जाता है, 51 और 100 के बीच ‘‘संतोषजनक’’, 101 और 200 के बीच ‘‘मध्यम’’ श्रेणी का, 201 और 300 के बीच ‘‘खराब’’, 301 और 400 के बीच ‘‘बेहद खराब’’ और 401 से 500 के बीच एक्यूआई ‘‘गंभीर’’ माना जाता है। केंद्र की वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान और अनुसंधान प्रणाली ने भी एक्यूआई ‘बेहद खराब’ श्रेणी का दर्ज किया। सीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार, फरीदाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और गुड़गांव में भी वायु गुणवत्ता का स्तर गुरुवार को ‘बहुत खराब’ श्रेणी का दर्ज किया गया। राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को वायु गुणवत्ता में सुधार देखा गया था लेकिन बुधवार को यह फिर से गिरकर ‘बेहद खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया। (जनसत्ता ऑनलाइन इनपुट सहित)
