नरेंद्र मोदी सरकार की अग्निपक्ष की स्कीम सेना से रिटायर हो चुके जवानों को रास नहीं आ रही है। उनका कहना है कि सेना से सरकार खिलवाड़ न ही करे तो अच्छा है। चार साल बाद सेना से लौटने के बाद ये ही अग्निवीर गैंगस्टर बन गए तो सरकार क्या करेगी। उनका कहना है कि ये एक मूर्खतापूर्ण फैसला है। इसकी वजह से केवल मुश्किलें पेश आने वाली हैं।

इंडियन एक्सप्रेस ने रिटायर सैनिकों की संस्थाओं से बात की तो यही बात सामने आई। एक्स सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन फरीदकोट के प्रधान रिटायर हवलदार प्रेमजीत सिंह बरार का कहना है कि वो इसे सेना में भर्ती का सही विकल्प नहीं मानते। उनके मुताबिक एक सैनिक को पूरी तरह से तैयार होने में सात-आठ साल का वक्त लग जाता है। युवाओं को छह महीने की ट्रेनिंग देकर सरकार अगर ये उम्मीद कर रही है कि वो बेहतर जवान साबित हो सकते हैं तो ये एक बड़ी गलतफहमी है। उनकी यूनियन ने इस पर बात की पर ज्यादातर लोगों ने इसे बेसिरपैर की योजना बताया है। ये बिलकुल बेकार है।

सूबेदार दर्शन सिंह कहते हैं कि चार साल के लिए जो युवा सेना में आएगा, वह एक तरह से मेहमान सैनिक ही कहलाएगा और दुनिया में कहीं भी कोई जंग मेहमान सैनिकों के भरोसे नहीं जीती जाती। उनका कहना है कि इससे आने वाले समय में देश की सुरक्षा को खतरा भी हो सकता है। उनका कहना है कि सेना में रोजाना तकनीक बदल रही है। चार साल के दौरान जब तक युवा इनको कुछ हद तक सीखेगा तब वो रिटायर हो जाएगा। इससे न तो सेना का फायदा होगा न ही सरकार का।

रोहतक में कैप्टन शमशेर सिंह मलिक कहते हैं कि देश में बढ़ती हुई बेरोजगारी से निपटने और विपक्षी दलों के आरोप का जवाब देने के लिए सरकार ये स्कीम तो ले आई लेकिन खतरा इस बात का है कि कहीं ये सरकार के लिए ही अग्निपथ न साबित हो जाए। उनका कहना है कि ये फैसला सरासर गलत है।

ज्यादातर रिटायर सैनिक मानते हैं कि ऐसे अग्निवीरों को आसानी से भ्रमित किया जा सकता है। ऐसी सूरत में ये देश के लिए चुनौती साबित हो सकते हैं। इन जवानों को बाद में महसूस होगा कि चार साल तक इनका इस्तेमाल किया गया और फिर एक सर्टिफिकेट हाथ में थमाकर हाशिये पर फेंक दिया गया। वो कुंठा का शिकार होकर गलत कदम उठा सकते हैं।

बरवाला के युवक जितेंद्र आखिर में पते की बात कहते हैं। उनका कहना है कि वो खुद सेना में भरती के लिए हाथ पैर मार रहे हैं। हालात बहुत खराब हैं। ऐसे में कुछ लोग तो इसमें आवेदन करेंगे। उनका कहना है कि किसी को भूखा रखोगे तो वो आखिर में रूखी सूखी रोटी खाने के लिए भी तैयार हो जाएगी।