दिल्ली के लगभग 1,800 प्राइमरी स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया गया। शुक्रवार (4 नवंबर) को लिए गए इस फैसले के पीछे लगातार बढ़ रहे प्रदूषण की वजह से खराब होते हालात हैं। दिल्ली में इस वक्त पिछले कुछ सालों के मुकाबले सबसे ज्यादा प्रदूषण हैं। खबरों की मानें तो प्रदूषण ने पिछले 17 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। दिवाली के बाद राजधानी में इतना धुआं, धूल व कुहासा छाया रहा कि दिन में भी गाड़ियों की हेडलाइट जलानी पड़ी। विज्ञान व पर्यावरण केंद्र ने दिल्ली मौसम विभाग के रपट के हवाले से कहा है कि दो नवंबर की रपट बताती है कि स्मॉग (धूल व धुआं मिला कुहरा) ने बीते 17 बरस के रेकार्ड तोड़ दिए हैं।
गौरतलब है कि शुक्रवार को ही पर्यावरण मंत्रालय ने पड़ोसी राज्यों के लोगों को बुलाकर एक मीटिंग भी की थी। मीटिंग नें बढ़ते प्रदूषण की रोकधाम के लिए क्या कदम उठाए जाएं इसपर विचार किया गया था। इससे पहले सोमवार को यूनिसेफ ने भी एक रिपोर्ट जारी की थी। उसमें कहा गया था कि 5 साल से कम उम्र के 6 लाख बच्चे घर और बाहर पर होने वाले प्रदूषण की वजह से मर जाते हैं।
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दिल्ली की हवा इन दिनों लगातार खराब होती जा रही है। शहरीकरण की वजह से डीजल इंजन, कोयले के पॉवर प्लांट और फैक्ट्रियों ने निकलने वाले धुंए से हालात खराब होते जा रहे हैं। इसके अलावा पंजाब और बाकी आसपास के इलाकों में जलने वाली फसल से भी दिल्ली प्रदूषित होती है। वहीं लड़कियों की मदद से खाना बना रहे लोग भी प्रदूषण को बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं।
