जम्मू-कश्मीर में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हथियारों के लाइसेंस जारी करने के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) ने पड़ताल शुरू कर दी है। वर्ष 2012 से 2016 के बीच फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जम्मू-कश्मीर के सात जिलों से सवा चार लाख से ज्यादा लाइसेंस जारी किए गए। इस मामले में सीबीआइ ने दो प्राथमिकियां दर्ज की हैं, जिसमें विभिन्न जिलों के पूर्व और मौजूदा प्रशासनिक अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है। इस मामले में कई वरिष्ठ आइएएस अधिकारियों की संलिप्तता भी सामने आई है।
इस मामले में जम्मू-कश्मीर व राजस्थान पुलिस के एटीएस ने अलग-अलग जांच में बड़े स्तर पर लाइसेंस रद्द किए। हथियार जब्त किए गए और 55 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जारी किए गए लाइसेंस के जरिए न सिर्फ जम्मू-कश्मीर और राजस्थान में, बल्कि बिहार और झारखंड तक में बड़े पैमाने पर हथियार खरीदे गए। छोटे हथियारों में बदलाव कर उन्हें एके-47 जैसे हथियारों की शक्ल दी गई। राजस्थान व जम्मू कश्मीर के एटीएस की पड़ताल में अभी तक अजमेर निवासी हथियार कारोबारी मोहम्मद जुबेर को मुख्य अभियुक्त माना गया है। दोनों राज्य सरकारों की सिफारिश पर मामले की जांच सीबीआइ को सौंपी गई। सीबीआइ की छानीगढ़ इकाई में एफआइआर दर्ज की गई है।
इस मामले को सीबीआइ को सौंपने के लिए राजस्थान पुलिस के महानिदेशक गलहोत्रा ने हाल में कश्मीर के गृह मंत्रालय को पत्र लिखा था। उन्होंने अपने पत्र में साफ लिखा कि इस मामले में जम्मू-कश्मीर कैडर के कई आइएएस अधिकारी शामिल हैं। एटीएस की पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि इस राज्य के जिलों से चार साल के दौरान कुल 4,29,301 लाइसेंस फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जारी कर दिए गए। अकेले जम्मू के डोडा, रामबन, ऊधमपुर जिलों से 1,43,013 लाइसेंस जारी किए गए।
लाइसेंस बनवाने वालों में 3367 लोग थल सेना, वायुसेना, नौसेना, कोस्ट गार्ड व अर्द्धसैनिक बलों के भी हैं। इस मामले में आॅपरेशन जुबैदा के नाम से चलाए गए धरपकड़ अभियान में कुल 55 लोग पकड़े गए। इन लोगों में जम्मू-कश्मीर के एक वरिष्ठ आइएएस अधिकारी ज्योति रंजन का भाई भी है, जिसे कुछ दिनों पहले हरियाणा से पकड़ा गया। आरोप है कि एक लाइसेंस के एवज में हथियार लॉबी ने उसे 40 लाख रुपए दिए थे। इस मामले में कुल 1188 हथियार लाइसेंस और 66 हथियार जब्त किए जा चुके हैं। राजस्थान एटीएस ने अपनी जांच के बाद बीते चार अक्तूबर को जयपुर की एक अदालत में 3363 पेज की चार्जशीट दाखिल की।
राजस्थान और जम्मू-कश्मीर एटीएस ने अब तक जब्त किए 1188 हथियार लाइसेंस और 66 हथियार
-पहली एफआइआर 11 सितंबर, 2017 को राजस्थान एटीएस ने दर्ज की। फर्जी लाइसेंस प्रकरण में वहां के एक आइएएस अधिकारी समेत कई प्रशासनिक अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई है।
-जम्मू-कश्मीर के सात जिलों से फर्जी हथियार लाइसेंस राजस्थान, बिहार, झारखंड समेत कई राज्यों के लोगों ने बनवाए। इनमें सैन्य बलों के सैकड़ों लोग भी हैं।
-हथियार लॉबी जिन लोगों के लाइसेंस बनवाती, जम्मू-कश्मीर में उनके पते के फर्जी दस्तावेज तैयार कराती।
-इस मामले में अजमेर निवासी मोहम्मद जुबेर को मुख्य अभियुक्त माना गया। जम्मू-कश्मीर में गृह विभाग के साथ ही कुपवाड़ा, कठुआ, रामबन और श्रीनगर आदि जिला मजिस्ट्रेट कार्यालयों में अधिकारियों व कर्मचारियों से सांठ-गांठ थी।
-जुबेर ही मध्य प्रदेश के देवास स्थित मैसर्स मालवा बंदूक घर के मालिकों मोहम्मद जफर और प्यारे मोहम्मद से मिलीभगत कर इन फर्जी लाइसेंसधारकों को हथियार दिलवाता था।
