ढाई साल पुराने मथुरा के चर्चित जवाहरबाग हिंसा कांड में 45 लोगों को दोषी ठहराया गया है। इन सभी को अधिकतम तीन-तीन साल की सजा सुनाई गई है। वहीं मुख्य आरोपी चंदन बोस, उसकी पत्नी पूनम बोस और श्यामवती नाम की एक महिला को छोड़ा गया है। इस घटना में दो पुलिस अधिकारियों की भी मौत हो गई थी।फिलहाल रामवृक्ष यादव के समर्थक भी उसे मृत मानने को तैयार नहीं हैं, इसी के चलते वे विरोध में 17 जनवरी से रैली निकाल रहे हैं।
पुलिस से भिड़ गए थे रामवृक्ष यादव समर्थकः जून 2016 में इस जगह को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए पुलिस ने कार्रवाई की थी, इसी दौरान वारदात के सूत्रधार रामवृक्ष यादव के समर्थकों ने पुलिस वालों पर भी हमला बोल दिया था। इस घटना में मथुरा के तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल उपाध्याय और थानाध्यक्ष संतोष कुमार की मौत हो गई थी।
रामवृक्ष को लेकर सस्पेंस बरकरारः 2 जून 2016 को हुए इस कांड के बाद रामवृक्ष यादव के भी मरने की बात सामने आई थी। लेकिन इसका कोई सबूत नहीं मिल पाया। इसके चलते समर्थक यह मानने को तैयार नहीं हैं कि उसकी मौत हो चुकी है। इसी के चलते समर्थक देवरिया से एक रैली निकाल रहे हैं जो 23 जनवरी को मथुरा पहुंचेगी। इसे लेकर पुलिस भी चौकन्ना हो गई है।
ऐसे हुई थी शुरुआतः मथुरा में जवाहर बाग की बेशकीमती जमीन को रामवृक्ष और उसके समर्थकों ने सत्याग्रह के नाम पर कब्जा कर लिया था। इसी से मुक्त कराने के लिए पुलिस कार्रवाई कर रही थी। कब्जे के मामले में 100 से ज्यादा लोग जेल में हैं।
