Shankaracharya Avimukteshwaranand Controversy: प्रयागराज में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का धरना जारी है। इसके चलते यूपी की सियासत गरम हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शंकराचार्य से बातचीत भी की। टीवी चैनल्स पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अखिलेश की तारीफ करते भी दिखे और उन्होंने गौहत्या को लेकर सीएम योगी पर सवाल उठाए। इस मुद्दे पर पूर्व एक्ट्रेस और साध्वी ममता कुलकर्णी ने शंकराचार्य पर ही सवाल खड़े किए हैं।

दरअसल, न्यूज एजेंसी IANS से बातचीत में पूर्वे एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी ने पीएम मोदी की तारीफ की। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के अलावा मुझे कोई और नेता नजर नहीं आता। हालात देखिए, प्रधानमंत्री मोदी हैं, तो फिर कहीं कुछ गलत हो ही नहीं रहा? अगर किसी को गलत लग रहा है तो बताइए।”

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क्या अखिलेश शासन में निकलेगा गौहत्या का हल?

ममता कुलकर्णी ने कहा, “हम सब कुछ शांतिपूर्वक कर रहे हैं; किसी को किसी से कोई समस्या नहीं है।” इसके साथ ही सांकेतिक तौर पर ममता कुलकर्णी पर हमला भी बोल दिया। उन्होंने कहा, “ये लोग यानी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी, समाजवादी पार्टी की ओर झुक रहे हैं क्योंकि उनका एक ही मुद्दा है। गायों की हत्या नहीं होनी चाहिए। तो क्या अखिलेश यादव के साथ जाने से ये सवाल हल हो जाएंगे?”

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कानूनी समानता की कही बात

ममता कुलकर्णी ने शंकराचार्य सरस्वती को लेकर कहा है कि इस पूरे मामले में शंकराचार्य की वजह से उनके शिष्यों को लात-घूंसे खाने पड़े। अगर स्नान ही करना था, तो पालकी से उतरकर पैदल जाकर स्नान किया जा सकता था। गुरु होने का अर्थ जिम्मेदारी से भरा आचरण होता है, न कि ऐसी जिद, जिसकी कीमत शिष्यों को चुकानी पड़े।

ममता कुलकर्णी ने कहा कि कानून सबके लिए समान है, चाहे वह राजा हो या रंक, गुरु हो या शिष्य। केवल चार वेद कंठस्थ कर लेने से कोई शंकराचार्य नहीं बन जाता। उनमें काफी अहंकार है और आत्मज्ञान शून्य है।

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शंकराचार्य के समर्थन में अखिलेश

गौरतलब है कि सपा नेता अखिलेश यादव ने अविमुक्तेश्वरानंद को अपना समर्थन दिया और योगी सरकार पर सनातन धर्म का अपमान करने का आरोप लगाया। इस क मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी भी बीजेपी पर हमला बोलती नजर आ रही है।

हालांकि, बीजेपी खुद इस विवाद पर बंटी हुई नजर आ रही है, जहां ज्यादातर पार्टी नेता चुप्पी साधे हुए हैं वहीं कुछ अन्य नेताओं ने आंदोलनकारी संत के प्रति सुलह के प्रयास किए हैं। कैसे मिलती हैं शंकराचार्य की उपाधि, क्या है इनकी अहमियत?