महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अगर उन्होंने कभी राजनीति में ‘लचीला रुख’ अपनाया भी, तो वह कभी भी निजी फायदे या स्वार्थ के लिए नहीं होगा।
राज ठाकरे की यह पोस्ट इसलिए अहम है क्योंकि कुछ दिन पहले ही एमएनएस के पांच पार्षदों ने ठाणे जिले के कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना को समर्थन दिया था।
एमएनएस पार्षदों के इस फैसले को लेकर राजनीतिक विश्लेषक हैरान थे क्योंकि एमएनएस ने 15 जनवरी को हुए नगर निकाय चुनावों में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था।
दोनों दलों का यह गठबंधन कल्याण-डोंबिवली नगर निगम, बीएमसी और राज्य के कई नगर निगमों में था।
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राज ठाकरे ने यह टिप्पणी उनके चाचा और अविभाजित शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे की 100वीं जयंती के अवसर पर की। राज ठाकरे ने 2005 में शिवसेना छोड़ दी थी और अगले साल एमएनएस का गठन किया था।
क्या कहा राज ठाकरे ने?
एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने X पर मराठी में लिखा, ‘आज के वक्त में निष्ठाएं आसानी से बिक जाती हैं। सिद्धांतों को त्याग दिया जाता है और राजनीति पूरी तरह से अवसरवादी हो गई है।’ राज ठाकरे ने कहा है कि आज की राजनीति में सफलता इस बात से आंकी जाती है कि चुनावी राजनीति में आप कितने कामयाब हुए और वहां तक पहुंचने के लिए कौन से हथकंडे अपनाए गए।
राज ठाकरे ने आगे लिखा, ‘बालासाहेब ठाकरे के समय में ऐसे समझौते नहीं होते थे। उन्हें सत्ता का लालच नहीं था… यहां तक कि जब बालासाहेब को कभी-कभी राजनीति में लचीला रुख अपनाना पड़ा, तब भी मराठी लोगों के प्रति उनका प्रेम जरा भी कम नहीं हुआ बल्कि यह और भी मजबूत हो गया।”
ठाकरे ने आगे कहा कि वह वचन देते हैं कि यदि उन्होंने कभी भी राजनीति में थोड़ा लचीला रुख अपनाया तो यह कभी भी उनके अपने फायदे या स्वार्थी हितों के लिए नहीं होगा। एमएनएस और शिवसेना (यूबीटी) के गठबंधन की वजह से राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे 20 साल बाद साथ आए थे।
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