कर्नाटक में अपने सबसे बड़े चेहरे बीएस येदियुरप्पा को आगे कर भाजपा ने वहां सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। चावल मिल के क्लर्क और एक किसान नेता से आगे बढ़कर येदियुरप्पा दक्षिण में पहली बार कर्नाटक में भाजपा का कमल खिलाने वाले नायक बने थे और अब 2018 में उन्होंने एक बार फिर भाजपा के लिए सत्ता सुनिश्चित की है। हालांकि, पांच साल पहले 2013 में विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के लिए येदियुरप्पा खलनायक बन गए थे।

कर्नाटक में येदियुरप्पा अपनी पुरानी परंपरागत शिकारीपुरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़े थे। यह लिंगायत बहुल सीट मानी जाती है। येदियुरप्पा खुद लिंगायत समुदाय से आते हैं। बीएस येदियुरप्पा 75 साल के हैं। 1972 में उन्हें शिकारीपुरा तालुका जनसंघ का अध्यक्ष चुना गया। 1977 में जनता पार्टी के सचिव चुने गए। 1983 में वह पहली बार विधानसभा पहुंचे। अब तक सात बार शिकारीपुरा से विधायक निर्वाचित हो चुके हैं। वह तीसरी बार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

येदियुरप्पा की बदौलत भाजपा ने 2008 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। नवंबर 2007 में जनता दल (एस) के साथ गठबंधन सरकार गिरने से पहले भी सात दिनों के लिए मुख्यमंत्री रहे थे। येदियुरप्पा के अभियान के दम पर 2008 में कर्नाटक में भाजपा बहुमत हासिल करने में सफल रही। हालांकि, खनन क्षेत्र से जुड़े प्रभावशाली रेड्डी बंधु जनार्दन और करुणाकर उनके लिए परेशानी का सबब बने रहे। ये रेड्डी बंधु अब भाजपा के साथ हैं।
खनन घोटाले में लोकायुक्त की रिपोर्ट येदियुरप्पा के गले की फांस बनी और उन्हें भ्रष्टाचार की वजह से अपनी मुख्यमंत्री की कुर्सी गंवानी पड़ी थी।

उन पर जमीन और अवैध खनन घोटाले के आरोप लगे थे। वह जेल गए और फिर रिहा हुए। इसके बाद उन्होंने भाजपा से बगावत करके अपनी पार्टी बनाई। वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ-साथ उन्हें भी करारी हार का मुंह देखना पड़ा। इसके बाद मोदी के प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनने के बाद जनवरी 2013 में उनकी वापसी हुई।