कर्नाटक में बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद भी सियासी ड्रामा खत्म नहीं हुआ है। खबरों के मुताबिक जनता दल सेक्यूलर (जेडीएस) के विधायक दो खेमे में बंट गए हैं। विधायकों का एक धड़ा बीजेपी को समर्थन देने के पक्ष में है। वहीं, दूसरा धड़ा विपक्ष के तौर पर सदन में बैठना चाहता है। समर्थन देने के पक्ष में खड़े विधायकों का जेडीएस प्रमुख से कहना है कि या तो बीजेपी के साथ गठबंधन कर समर्थन दिया जाए या फिर बिना सरकार में रहे बाहर से ही बीजेपी को समर्थन दिया जाए। बैठक के बाद पूर्व मंत्री जीटी देव गौड़ा ने कहा कि बीजेपी को समर्थन देने के पक्ष में खड़ा विधायकों का खेमा इस बात को लेकर काफी स्पष्ट दिखा। गौड़ा ने कहा कि इस मामले का फैसला उन्होंने कुमारस्वामी पर छोड़ दिया है।

जेडीएस का यह हैरान करने वाला रुख विश्वासमत में मिली शिकस्त के बाद सामने में आया। विश्वासमत से पहले जेडीएस ने बीजेपी पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया था। हालांकि विधानसभा में फ्लोर टेस्ट में असफल होने के बाद कुमारस्वामी ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था कि यह सब राजनीति का हिस्सा है। कोई भी इस सीट पर हमेशा नहीं बैठा रहेगा, इस राज्य ने अबतक 23 मुख्यमंत्री देखे हैं। बता दें राजनीतिक तल्खियों को देखते हुए यह गठबंधन इतना आसान नहीं होने वाला है। गौरतलब है कि कुमारस्वामी ने 2006 में भाजपा के साथ गठबंधन बनाने के लिए कांग्रेस के साथ गठबंधन तोड़ लिया था।

स्पीकर को हटाएगी बीजेपी: कर्नाटक में तीन विधायकों को अयोग्य करार देने वाले विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार को बीजेपी हटा सकती है। इन विधायकों ने कांग्रेस-जेडीएस की सरकार गिराने में अहम भूमिका निभाई थी।ऐसे में 14 अन्य विधायकों में भी खौफ का माहौल है। ऐसे में स्पीकर के खिलाफ बीजेपी अविश्वास प्रस्ताव ला सकती है। ऐसे में अन्य बागी विधायकों के अयोग्य होने का खतरा भी टल जाएगा। सूत्रों की मानें तो बागी विधायकों में कुछ विधायकों को येदियुरप्पा सरकार में मंत्री बनाया जा सकता है।

संविधान के अनुच्छेद 179 (सी) के अनुसार किसी भी विधानसभा स्पीकर को सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाकर उसे बहुमत से पास कर पद से हटाया जा सकता है। इसके लिए, किसी भी मौजूदा स्पीकर को हटाने के लिए 14 दिन पहले प्रस्ताव का नाटिस देना होता है। जैसे ही प्रस्ताव लाया जाता है, उसके बाद स्पीकर किसी को अयोग्य नहीं ठहरा सकता है। मालूम हो कि इस प्रक्रिया से पहले येदियुरप्पा को 29 जुलाई को विधानसभा में बहुमत साबित करना है।