जम्मू कश्मीर में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि बंदूक से किसी समस्या का हल नहीं निकल सकता। उन्होंने साथ ही कहा कि उन्हें आशा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के अधूरे काम को पूरा करेंगे और राज्य की समस्याओं को ठीक करेंगे। महबूबा ने हिंसा में शामिल युवाओं से भावुक अपील करते हुए कहाकि जो लोग कश्मीर को जलते हुए देखना चाहते हैं उनसे भ्रमित न हों। खूबसूरत कश्मीर को सीरिया और अफगानिस्तान बनने से बचाना होगा।
उन्होंने कहा, ”जम्मू कश्मीर के लोग बुरे नहीं है और न ही भारत के लोग बुरे हैं। चुनावों के संबंध में कुछ गड़बडि़यां हुई हैं। जवाहरलाल नेहरू से लेकर अब तक के नेतृत्व और पार्टियों की गलती है।” उन्होंने कहा, ”जम्मू कश्मीर के लोगों ने बिना धर्म के बारे में विचार किए लोकतंत्र को चुना और इतने बड़े देश के साथ आए। लेकिन हमारा लोकतंत्र केवल वोट डालने तक सीमित क्यों रहा? पारदर्शी चुनाव साल 2002 में कश्मीर पहुंचे, ऐसा क्यों? हमारे यहां और दिल्ली के सिस्टम ने 1987 के चुनावों में उन लोगों के अधिकारों को छीन लिया जो विधायक, मंत्री और मुख्यमंत्री बन सकते थे। वे जम्मू कश्मीर के संविधान के साथ भारत के संविधान की शपथ लेना चाहते थे। इसमें जम्मू कश्मीर के लोगों की कोई गलती नहीं।”
इससे पहले झंडा फहराने के दौरान उन्हें शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ा। महबूबा ने जब बक्शी स्टेडियम में तिरंगा फहराया तो वह जमीन पर गिर गया। महबूबा पहली बार तिरंगा फहरा रही थी। उन्होंने जैसे ही झंडा फहराने के लिए डोरी को खींचा तो तिरंगा जमीन पर आ गया। इस पर महबूबा की सुरक्षा में तैनात दो कर्मचारियों ने झंडे को संभाला। इसके बाद मुख्यमंत्री ने सलामी दी।
महबूबा बाद में जब पुलिस और अर्धसैनिक बलों की टुकडि़यों का निरीक्षण करने गई जब सिक्योरिटी स्टाफ ने तुरंत झंडे को ठीक किया और उसे ऊपर लगाया। महबूबा मुफ्ती इसी साल जम्मू कश्मीर की सीएम बनी है। वह इस राज्य की पहली महिला सीएम हैं। अपने भाषण के दौरान उन्होंने
