जम्मू कश्मीर पुलिस ने शनिवार (26 जनवरी, 2019) को श्रीनगर में टॉप नेशनल और इंटरनेशनल मीडिया संगठनों के लिए काम करने वाले 6 सीनियर फोटो और वीडियो पत्रकारों को शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम में गणतंत्र दिवस समारोह को कवर करने से रोक दिया। पुलिस ने बताया कि सीआईडी ने उन्हें जानकारी दी कि इन प्रत्रकारों के खिलाफ प्रतिकूल रिपोर्ट थी। इसके उलट श्रीनगर में पत्रकार एसोसिएशन ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में शहर में गणतंत्र दिवस समारोह का बहिष्कार किया।
जम्मू-कश्मीर पुलिस की सुरक्षा विंग ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (सुरक्षा कश्मीर) द्वारा हस्ताक्षरित एक पत्र में लिखा है, ‘मीडिया संगठनों से संबंधित नीचे के व्यक्तियों के संबंध में CID रिपोर्ट प्रतिकूल पाई गई है और आपको निर्देश दिया जाता है कि इन्हें गणतंत्र दिवस 2019 के लिए आयोजन स्थल पर जाने की अनुमति नहीं दी जाए।’ लेटर में जिन लोगों का नाम लिखा गया उनमें एसोसिएटेड प्रेस टीवी (APTN) के मेहराजउद्दीन (ब्यूरो चीफ) और उमर मेहराज (वीडियो पत्रकार) के अलावा एएफपी के फोटो पत्रकार तवसीफ मुस्तफा, एएनआई ब्यूरो चीफ बिलाल अहमद भट्ट, रायटर्स के फोटो पत्रकार दानिश इस्माइल वानी और डेली कश्मीर उज़मा के फोटो पत्रकार अमन फारूख थे। सभी छह पत्रकार जम्मू-कश्मीर के सूचना विभाग से मान्यता प्राप्त हैं।
खबर है कि जैसे ही अन्य पत्रकारों को इन पत्रकारों को कार्यक्रम स्थल पर जाने देने की अनुमति देने से रोका है तो सभी पत्रकारों ने गणतंत्र दिवस समारोह का बहिष्कार किया। इसके अलावा पत्रकारों ने पुलिस एक्शन के विरोध में श्रीनगर में एक रैली भी निकाली।
मामले में एडीजीपी (सुरक्षा और कानून व्यवस्था) मुनीर खान ने संडे एक्सप्रेस को बताया, ‘जैसे ही मामला मेरे संज्ञान में आया मैंने तुरंत एसएसपी सुरक्षा से इसकी रिपोर्ट मांगी है।’ वहीं सुरक्षा विभाग के एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने कहा कि सीआईडी द्वारा रिपोर्ट मिलने के बाद उन्होंने ऐसा किया। उन्होंने कहा, ‘वेरिफिकेशन प्रोसेस सीआईडी द्वारा किया जाता है और एक बार जब वे किसी के खिलाफ एक प्रतिकूल रिपोर्ट देते हैं, तो हम उन्हें सुरक्षा कारणों से कार्यक्रम स्थल के अंदर जाने की अनुमति नहीं दे सकते।
एएफपी के पत्रकार तवसीफ मुस्तफा ने बताया, ‘गणतंत्र दिवस समारोह स्थल के एंट्री गेट पर मैं सुबह 9 बजे पहुंच गया। मैंने जम्मू-कश्मीर सुरक्षा विंग द्वारा जारी किया उन्हें अपना पास दिखाया। इसपर मुझे इंतजार करने के लिए कहा। थोड़ी देर बाद सुरक्षा अधिकारियों ने मुझे बताया कि कुछ पत्रकारों के अलावा उन्हें भी अंदर जाने की अनुमति नहीं देने के ऑर्डर हैं।’ मुस्तफा ने कहा कि उन्हें 28 साल में पहली बार कश्मीर में इस तरह का हालात देखने को मिले हैं।
मुस्तफा के मुताबिक उन्होंने 1999 के कारगिल वार के अलावा अफगानिस्तान, इराक और सीरिया में से भी रिपोर्ट की है। उन्होंने कहा, ‘मैंने दर्जनों बार प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों को कवर किया है मगर पहले कभी इस तरह की परेशानी नहीं झेली।’
