जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के लारु इलाके में मुठभेड़ के दौरान हुए विस्फोट में 7 कश्मीरी नागरिक मारे गए । इन 7 कश्मीरी नागरिकों की मौत पर विरोध जताने के लिए ,जम्मू- काश्मीर के श्रीनगर में लालचौक पर अलगाववादियों ने धरना और प्रदर्शन का कार्यक्रमम रखा था। इसे विफल करने के उद्देश्य से प्रशासन ने शहर के कई हिस्सों में पाबंदियां लगा दी। पुलिस ने एडवाइजरी जारी करते हुए कहा कि लालचौक के आस पास के इलाके में किसी को आने की अनुमति नहीं होगी। लगातार दूसरे दिन मंगलवार को भी पाबंदियों के लगे रहने से सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा।
रविववार को कुलगाम जिले में सेना और आतंकियों के साथ मुठभेड़ चल रही थी। घटनास्थल पर सेना के मना करने के बाद भी, आतंकियों के बचाने के इरादे से काफी संख्या ,में लोग जमा होते चले गए। तभी अचानक मुठभेड स्थल पर हुए एक बम विस्फोट से 7 लोगों की जान चली गयी। इसी का घटना का विरोध करने के लिए अलगाववादियों ने एक योजना बनाकर लालचौक पर इकट्ठे होने की बात कही थी।
इस विरोध कार्यक्रम की योजना को अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी, मीवाइज उमर फारुख और मोहम्मद यासीन ने सयुंक्त प्रतिरोध नेतृत्व (जेआरएल) के बैनर तले तैयार किया था। फिलहाल मीरवाइज और गिलानी को नजरबंद रखा गया है। इंटरनेट सेवाओं और मोबाइल सेवाओं को भी बंद कर दिया है।
विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस अधिकारीयों ने लालचौक के ऐतिहासिक घंटाघर की तरफ जाने वाले सभी रास्तों को सील कर दिया और रास्तें में भारी पुलिस बल और अर्द्धसैनिक बलों को तैनात कर अलगाववादियों के मंसूबो पर पानी फेर दिया। इस घटनाक्रम से क्षेत्र की सभी निजी दुकाने, निजी कार्यालय वा अन्य कारोबारी प्रतिष्ठानो भी बंद रहे, सड़कों पर सार्वजनिक और निजी यातायात के साधन भी नदारद रहे। हालाँकि अलगाववादियों ने मंगलवार को बंद नहीं बुलाई थी फिर भी एहतियातन प्रशासन ने शहर के सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद करवा परीक्षाएं स्थगित करवा दी। सोमवार को अलगवावादियों ने बंद बुलाया था।

