पाकिस्तान पोषित आतंकवाद और हाल में नगरोटा में सेना के ठिकाने पर आतंकी हमले के साए में अमृतसर में ‘हॉर्ट आॅफ एशिया’ सम्मेलन शुरू हो गया है। इसका औपचारिक उद्घाटन रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी करेंगे। सम्मेलन में शिरकत के लिए प्रधानमंत्री मोदी शनिवार की शाम को अमृतसर पहुंचे। इससे पहले विभिन्न देशों के अधिकारियों ने सम्मेलन के एजंडे को अंतिम रूप देने के लिए बैठक की। इस सम्मेलन में एशिया में शांति और आपसी सहयोग और अफगानिस्तान के हालात प्रमुख मुद्दे होंगे। इस सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल के साथ वहां के प्रधानमंत्री के सलाहकार सरताज अजीज भी शनिवार को अमृतसर पहुंच गए हैं। अजीज रविवार को अमृतसर पहुंचने वाले थे और उनका महज दो घंटे रुकने का कार्यक्रम था। ऐसे में उनके शनिवार को ही भारत पहुंच जाने को अहम संकेत समझा जा रहा है। हालांकि भारतीय अधिकारियों ने इस दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को लेकर किसी भी तरह की बातचीत से इनकार किया है।

‘हॉर्ट आॅफ एशिया’ सम्मेलन का स्थायी अध्यक्ष अफगानिस्तान है जबकि भारत इस साल सह-अध्यक्ष होने के नाते सम्मेलन का मेजबान है। मंत्री स्तरीय सम्मेलन की सह- अध्यक्षता भारतीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और अफगानिस्तान के विदेश मंत्री करेंगे। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज बीमार होने के कारण इसमें हिस्सा नहीं ले रही हैं। सम्मेलन में पाकिस्तान, चीन, ईरान, रूस और अफगानिस्तान समेत 40 देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इस सम्मेलन में यूरोपीय यूनियन भी भाग ले रहा है।

शनिवार की सुबह नौ बजे 14 देशों के उच्च अधिकारियों ने सम्मेलन का एजंडा तय करने के लिए बैठक शुरू की। इसमें पांच प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होनी है- अफगानिस्तान में शांति बहाली की प्रक्रिया की नए सिरे से शुरुआत, अफगानिस्तान का दक्षिण और मध्य एशिया के देशों से जुड़ाव और उनके साथ कारोबार बढ़ाने पर जोर, एशिया में आतंकवाद, कट्टरता और उग्रवाद के बढ़ते खतरे से निपटना, सम्मेलन में शामिल देशों की सुरक्षा और संपन्नता, पांच देशों से गुजरने वाली गैस पाइपलाइन और चाबहार बंदरगाह की परियोजना।
बड़ा एजंडा क्षेत्रीय आतंकरोधी फ्रेमवर्क तैयार करने का है। शनिवार को भारत के विदेश सचिव एस जयशंकर और अफगानिस्तान के उप विदेश मंत्री हिकमत खलील करजई की संयुक्त अध्यक्षता में इस फ्रेमवर्क की रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा की गई। इसमें रविवार को होने वाली मंत्रीस्तरीय बैठक का एजंडा तय किया गया और उस घोषणापत्र का प्रारूप तय किया गया, जिसमें आतंकवाद पर विचार-विमर्श जारी रखने का सुझाव है।