स्कूलों और अस्पतालों से आवारा कुत्तों को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के विरोध में रविवार शाम को दर्जनों लोग गुड़गांव में इकट्ठा हुए और नारेबाजी की। इन लोगों के हाथ में ‘कुत्ता नहीं तो वोट नहीं’, ‘आवारा पशुओं को देखभाल की जरूरत है, पिंजरों की नहीं’, ‘हमारा ग्रह, उनका भी’ और ‘अनमोल, बेकार नहीं, सड़क पर रहने वाले पशुओं की रक्षा करें’, ‘कर्म आपकी सोच से ज्यादा जोर से भौंकता है’ जैसे पोस्टर लगे हुए थे।
प्रदर्शनकारियों में कई युवा भी शामिल हुए और उन्होंने बाजार का चक्कर लगाया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि आदेश वापस लिया जाए और उन्होंने “आवारा नहीं हमारा है” और “महादेव के बच्चों को कैसे मार सकते हो?” के नारे लगाते हुए मिलेनियम सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन की ओर शांतिपूर्वक मार्च किया।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश पूरी तरह से अमानवीय- निकिता यादव
एक कमर्शियल पायलट निकिता यादव ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “यह आदेश पूरी तरह से अमानवीय है। सभी जानवरों के साथ सही व्यवहार किया जाना चाहिए। नगर निगमों से अपेक्षा की जाती है कि वे एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल को लागू करें, लेकिन वे ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। नगर निगमों की उदासीनता के कारण, उन्हें (आवारा कुत्तों को) मौत के घाट क्यों भेजा जाना चाहिए।”
ये भी पढ़ें: सड़कें इंसानों के लिए हैं या आवारा कुत्तों के लिए?
सुप्रीम कोर्ट को हमारी चिंताओं का समाधान करना चाहिए- सुधीर सचदेवा
स्टैंड फॉर एनिमल्स के संस्थापक सुधीर सचदेवा बताया, “जानवरों के लिए न्याय पाने की हमारी प्रतिबद्धता अटल है और जब तक माननीय सुप्रीम कोर्ट हमारी चिंताओं का समाधान नहीं करता, हम इन प्रदर्शनों को नियमित रूप से जारी रखने की योजना बना रहे हैं। यह जरूरी है कि हम इस आदेश को वापस लेने के लिए एकजुट हों। वे (कुत्ते) हम पर भरोसा और विश्वास रखते हैं और यह जरूरी है कि हम उन्हें निराश न करें।” विरोध प्रदर्शन पर नजर रखने के लिए कम से कम तीन पुलिसकर्मी मौजूद थे।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश में क्या था?
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर को एक आदेश पारित किया था। इसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया गया था कि अस्पतालों, एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन से आवारा कुत्तों को हटाकर एनिमल बर्थ कंट्रोल नियम के मुताबिक नसबंदी और टीकाकरण करके शेल्टर में भेजे। अदालत ने यह भी साफ कहा कि इस प्रकार उठाए गए आवारा कुत्तों को उसी स्थान पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा जहां से उन्हें उठाया गया था। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि कोई भी व्यक्ति या संगठन उसके निर्देशों को लागू करने में प्राधिकारियों के समक्ष कोई बाधा या रुकावट पैदा नहीं करेगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…
