केरल इन दिनों भीषण बाढ़ की त्रासदी से जूझ रहा है। ऐसे कठिन वक्त में पूरे देश से केरल के बाढ़ पीडि़तों के लिए मदद भेजी जा रही है। इस नेक काम में अपना हाथ गुजरात के मेहसाणा जिले के भिखारी खिमजी प्रजापति ने भी बढ़ाया है। 71 साल के खिमजी प्रजापति शनिवार (1 सितंबर) को मेहसाणा जिले के जिलाधिकारी कार्यालय में पहुंचे थे। खिमजी ने भीख मांगकर जमा किए हुए 5,000 रुपये अतिरिक्त कलेक्टर को सौंप दिए। खिमजी को पेट का कैंसर है। तीन महीने पहले डॉक्टरों ने उन्हें ये जानकारी दी थी। उनके ठीक होने की उम्मीद भी बेहद कम है। लेकिन ये पैसे उन्होंने अपने इलाज पर खर्च करने के बजाय केरल के बाढ़ पीडि़तों की मदद के लिए देने का फैसला किया।
टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कलेक्टर के कार्यालय में बैसाखियों के सहारे पहुंचे खिमजी ने उनसे कहा, ” मैं बाढ़ प्रभावित केरल में लोगों को हुई हानि के बारे में सुनकर बेहद दुखी था। कोई भी चीज मुझे उतनी खुशी नहीं दे सकती, जितनी किसी जरूरतमंद को कुछ देकर मुझे मिलती है।” खिमजी, सिर्फ प्रार्थना करते हैं कि केरल सरकार जो पूरे जी-जान से राज्य के पुनर्निर्माण में जुटी हुई है, उसे दानदाताओं से मिलने वाले पैसों की कमी न पड़े। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रजापति ने कहा, “मैं खुश हूं कि गुजरात राज्य में ऐसी आपदा नहीं आई है। इसके बावजूद राज्य ने मदद के लिए 10 करोड़ रुपये देने का ऐलान किया है।”
रिपोर्ट के मुताबिक, मेहसाणा जिले के अतिरिक्त जिलाध्यक्ष हर्षद वोरा ने कहा कि कैंसर से पीडि़त भिखारी के ऐसे फैसले ने समाज के सामने निस्वार्थ प्रेम, त्याग और बलिदान का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है। हालांकि हम दान में कैश स्वीकार नहीं करते हैं। इसलिए हमने ये पैसा बैंक में जमा करने का इंतजाम किया है और प्रजापति को इसकी रिसीट दी है। वैसे बता दें कि डॉक्टरों ने प्रजापति को तीन महीने पहले कैंसर होने की पुष्टि की थी। खिमजी का इलाज राजकोट जिले के निजी डॉक्टर से चल रहा है। कुछ कार्पोरेट कारोबारियों ने खिमजी की परोपकार की भावना से प्रभावित होकर उसके इलाज के लिए 70,000 रुपये दान किए हैं। जबकि सूरत के एक परिवार ने भी 30 हजार रुपये की मदद की है।
खिमजी प्रजापति को वर्तमान में कीमोथैरिपी का इलाज दिया जा रहा है। मेहसाणा के जिलाधिकारी ने उनका इलाज वीजापुर के पास स्थित एक आयुर्वेदिक अस्पताल में करवाने का प्रस्ताव दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, खिमजी, राजकोट के डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद आयुर्वेदिक इलाज का फैसला लेंगे। खिमजी प्रजापति, मेहसाणा के सिमनधर स्वामी जैन मंदिर के बाहर भीख मांगते हैं। पिछले साल उन्होंने 10 स्कूली लड़कियों को पढ़ाई के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए सोने की बालियां दान की थीं। उनके इस त्याग को देखते हुए रोटरी क्लब ऑफ इंडिया ने उन्हें पिछले साल ‘शिक्षा हीरो पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया था।

